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जनौषधि केंद्र में बिकने से पहले एक्सपायर हो गई गरीबों के हिस्से की जेनरिक दवाएं

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demo pic - फोटो : अमर उजाला
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सोलन। क्षेत्रीय अस्पताल सोलन के जन औषधि केंद्र में रखी सस्ती दवाएं बिकने से पूर्व ही एक्सपायर हो गईं। एक्सपायर हुई एंटीबायोटिक जैनरिक दवाएं फरवरी 2016 में बनी थीं जिसका इस्तेमाल जनवरी 2018 से पहले होना था। यह दवाएं जरूरतमंद मरीजों के लिए बनी थीं। लेकिन डॉक्टरों ने मरीजों को इन दवाओं को लेने की सलाह नहीं दी। एक्सपायर हुई दवा पर 167.18 रुपये मूल्य अंकित है। इसी साल्ट के दूसरे ब्रांड की दवा और इंजेक्शन बाजार में 350 रुपये से अधिक में बेचे जाते हैं।
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दवा एक्सपायर होने के बाद जन औषधि केंद्र संचालक दूसरी दवाएं मंगवाने में भी परहेज कर रहे हैं। यही वजह है जो जन औषधि केंद्र में ब्लड प्रेशर, शूगर और दिल के रोगों की दवाएं नहीं मिलती। इसका प्रमुख कारण है कि चिकित्सक मरीजों को यहां दवाएं लिखते ही नहीं। जानलेवा बीमारियों की दवाएं जन औषधि केंद्र के मुकाबले ब्रांडेड कंपनियों की दवाएं 50 प्रतिशत से ज्यादा महंगी हैं। इन पर निजी कंपनियां डॉक्टरों को अच्छी खासी कमीशन भी देती हैं। इसके चलते कुछेक डॉक्टर जैनरिक दवाओं की जगह ब्रांडेड कंपनियों की दवाओं का इस्तेमाल करने की सलाह मरीजों को देते हैं। यही कारण है कि जन औषधि केंद्र में दवा सप्लाई करने वाली फर्मों ने ब्लड प्रेशर, शूगर और दिल के रोगों से जुड़ी दवाओं के स्टॉक न होने का फट्टा लगा दिया है। आम बीमारियों में इस्तेमाल होने वाली दवाओं की खरीद भी इतनी कम है कि स्टॉक बिना बिके ही एक्सपायर हो रहा है। सोलन अस्पताल के बाहर जनौषधि केंद्र में एंटीबायोटिक दवाएं बड़ी संख्या में एक्सपायर हुई हैं। अन्य दवाओं का स्टॉक भी आखिरी सांसें गिन रहा है।

अस्पताल की सप्लाई के सहारे जनौषधि केंद्र
जनौषधि केंद्र इस समय सिर्फ अस्पताल को दवा सप्लाई करने के सहारे चला है। अस्पताल की डिस्पेंसरी में मरीजों को मुफ्त मिल रही दवाओं को जनौषधि केंद्र से खरीदा जाता है। सोलन में हर माह करीब दो से तीन लाख रुपये की दवाएं अस्पताल प्रबंधन खरीदता है। डॉक्टर की सलाह पर सीधे जन औषधि केंद्र में दवा खरीदने पहुंचने वाले मरीजों की तादाद न के बराबर है।
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बहुत कम मरीज आते हैं : रवि ठाकुर
जन औषधि केंद्र के संचालक फार्मासिस्ट रवि ठाकुर ने कहा कि डॉक्टर की सलाह पर दवा लेने आने वाले मरीजों की संख्या बेहद कम हैं। दवाओं की मांग न होने की वजह से सप्लाई कम हो रही है। यही वजह है जो ब्लड प्रेशर, सुगर और हार्ट जैसी जरूरी दवाएं इस समय जन औषधि केंद्र में नहीं हैं। मरीज चाहे अमीर है या गरीब उसे यह दवाएं बाहर बाजार से ही लेनी पड़ेंगी।

जनौषधि केंद्र में 80 प्रतिशत तक सस्ती दवाएं
जन औषधि केंद्र में मरीजों को 80 प्रतिशत तक सस्ती दवाएं मिलती हैं। केंद्र सरकार ने गरीब लोगों की मदद के लिए जन औषधि केंद्र में जैनरिक दवाएं बेचने का प्रोजेक्ट देश भर में शुरू किया था। लेकिन निजी क्षेत्र की कड़ी स्पर्धा और कुछेक डॉक्टरों की मिलीभगत की वजह से प्रोजेक्ट चल नहीं पा रहा है। धीरे-धीरे जैनरिक दवाएं जन औषधि केंद्र से गायब हो रही हैं और जल्द ही इसके बंद होने की उम्मीदें बढ़ गई हैं।

जैनरिक दवा लिखने के दिए हैं निर्देश : एमएस
अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. महेश गुप्ता ने कहा कि सभी चिकित्सकों को जैनरिक दवाएं लिखने के निर्देश दिए हैं। हालात बदले हैं और बड़ी संख्या में मरीजों को सस्ती और मुफ्त की दवाएं मिल रही हैं। यदि ऐसी कोई शिकायत आती है तो अस्पताल प्रबंधन इस दिशा में कड़ा कदम उठाएगा। उन्होंने मरीजों से भी आह्वान किया है कि यदि डॉक्टर महंगी दवा लिखता है तो वह इसकी शिकायत कर सकते हैं।
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