सोलन। प्रदेश के किसान अदरक, हल्दी और लहसुन का उत्पादन कर अपनी आर्थिक स्थिति में सुधार कर सकते हैं। इन तीनों ही उत्पादों की सालभर मांग रहती है। यही नहीं प्रदेश की जलवायु भी इसके अनुकूल है। सालभर मांग रहने के कारण उत्पाद भी आसानी से बेचे जा सकते हैं। यह साल राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) के जिला विकास प्रबंधकों की तीसरी द्वि मासिक बैठक में वैज्ञानिकों ने किसानों को दी। बैठक का आयोजन डॉ यशवंत सिंह परमार विवि नौणी में हुआ। इसमें नाबार्ड के देहरादून क्षेत्रीय कार्यालय के अधिकारियों ने भी शिरकत की। बैठक में नाबार्ड के देहरादून क्षेत्रीय कार्यालय के पंद्रह जिला विकास प्रबंधकों ने विवि के वैज्ञानिकों से अपने राज्य में बागवानी की संभावनाओं पर सुझाव लिए और चर्चा की। बैठक का उद्देश्य अधिकारियों को बागवानी क्षेत्र में तकनीकी प्रगति और अपार अवसरों को उजागर करना था ताकि वे किसानों के लिए इनसे जुड़ी योजनाओं को बढ़ावा दे सकें।
उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश, दोनों ही राज्यों में एक समान तलरुप और समान जलवायु परिस्थितियां हैं। जहां हिमाचल इस क्षेत्र में काफी सफल रहा है वहीं उत्तराखंड अभी बागवानी में अपनी क्षमता का सही उपयोग करने में नाकाम रहा है। नौणी विवि के उप-कुलपति डॉ. एचसी शर्मा, निदेशक विस्तार शिक्षा डॉ. विजय विजय ठाकुर, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के मुख्य महाप्रबंधक डीएन मगर और किशन सिंह के अलावा संयुक्त निदेशक (ट्रेनिंग) डॉ. राजेश भल्ला और संयुक्त निदेशक (कम्युनिकेशन) डॉ. राज कुमार ठाकुर ने इस कार्यक्रम में भाग लिया।
मुख्य महाप्रबंधक डीएन मगर ने दोनों राज्यों में ग्रामीण प्रवास का मुद्दा उठाया। बताया कि उत्तराखंड में 978 गांव बिल्कुल खाली हैं। राज्य में करीब 1.14 लाख हेक्टेयर भूमि बंजर हो गई है। हिमाचल में बागवानी के कारण ऐसा नहीं हुआ है। डॉ. एचसी शर्मा ने कृषि को युवाओं के बीच एक सम्मानजनक व्यवसाय बनाने के लिए शिक्षा में सुधार पर जोर दिया। दोनों राज्यों में गैर मौसमी सब्जी और उच्च गुणवत्ता वाले अदरक, हल्दी और लहसुन की उत्पादन की संभावना बहुत है। पहले तकनीकी सत्र में. डॉ वीएस ठाकुर ने राज्य में सेब की खेती के बारे में बताया और इसके उत्पादन से संबंधित समस्याओं को साझा किया।
चंबाघाट मशरूम निदेशालय का करेंगे दौरा
बैठक के भाग ले रहे प्रतिभागियों ने सेब, फल, सब्जियों और फूलों के खेती पर चार तकनीकी व्याख्यानों में भाग लिया। प्रतिनिधियों ने हाइ-टेक फूलों की खेती, औषधीय और सुगंधित पौधों के खेतों का भी दौरा किया। मंगलवार को यह अधिकारी चंबाघाट स्थित मशरूम रिसर्च निदेशालय और कृषि विज्ञान केंद्र, कंडाघाट का दौरा भी करेंगे।