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बारिश से किसान चिंतित, सताने लगा पीले रतुए का भय

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बारिश से किसान चिंतित, सता रहा पीले रतुए का भय
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वीरवार को फिर बरसे मेघ, आज फिर है बारिश की संभावना
किसानों के लिए परेशानी बनी अत्यधिक बारिश
नालागढ़ उपमंडल में 42 हेक्टेयर भूमि पर होती है खेती
अमर उजाला ब्यूरो
नालागढ़ (सोलन)। वीरवार को एक बार फिर इंद्रदेव बरसे और क्षेत्र के किसानों की चिंता बढ़ गई है। इस बार मौसम ने बेशक मार्च माह में भी जनवरी जैसे ठंडे मौसम का अहसास दिलाया हुआ है। अत्यधिक बारिश किसानों की परेशानी बन गई है। खासतौर पर मैदानी इलाकों के किसानों को अब अपनी गेहूं की फसलों में पीला रतुआ रोग फैलने की आशंका बनी है, वहीं बारिश से खेतों में अत्यधिक नमी से गेहूं की पौध भी कमजोर हो गई है। इसके चलते हल्की सी हवाओं में फसल तबाह हो जाएगी। किसान अब फसलों में टिल्ट का स्प्रे करने में जुटे हैं। किसानों ने इन दिनों चने, गेहूं, सरसों के अलावा सब्जियों की खेती की हुई है, लेकिन अत्यधिक बारिशें इन फसलों के लिए अब नुकसानदायक साबित हो रही है। नालागढ़ उपमंडल के तहत 42 हेक्टेयर भूमि पर फसलों की पैदावार होती है जिसमें मैदानी और पहाड़ी इलाके शामिल हैं। किसानों की मानें तो पहाड़ी क्षेत्रों में ढलानदार खेतों में तो बारिश का पानी खड़ा न होकर निकल जाता है, लेकिन मैदानी क्षेत्रों व सीधे खेतों में पानी का जमा होना फसलों के लिए नुकसानदायक है। कृषि विभाग का कहना है कि अभी तक पीले रतुए रोग फैलने की सूचना तो नहीं है लेकिन किसान ऐहतियात के तौर पर दवा का छिड़काव कर रहे हैं। नालागढ़ उपमंडल दो इलाकों पहाड़ी और मैदानी क्षेत्र में बंटा है। सिंचाई सुविधा वाली जमीन 4861 हेक्टेयर है जबकि 6270 हेक्टेयर भूमि बीजाई कार्य के लिए बारिश पर निर्भर करती है। सिंचाई सुविधा वाली 4861 हेक्टेयर भूमि के अंतर्गत मंझौली, राजपुरा, ढांग, जगातखाना, निहली ढांग, ढाणा, सनेड़, भाटियां, दभोटा, नवांग्राम, पंजैहरा, जोघों, जगतपुर, बैरछा, बघेरी, खिल्लियां, घोलोंवाल, करसौली, गुल्लरवाला, बरूणा आते हैं। रेनफेड एरिया में मित्तियां, मैथल, रतवाड़ी, बारियां, रामशहर, थयोड़ा कई गांव आते हैं लेकिन इस बारिश ने खासतौर पर मैदानी इलाकों के किसानों की चिंता बढ़ा दी है। क्षेत्र के किसान योगेश शर्मा, प्रेम चौधरी, अवतार सिंह ने बताया कि अत्यधिक मात्रा में हो रही बारिश अब फसलों के लिए नुकसानदायक होने लगी है। उन्होंने कहा कि यदि आगामी दिनों बारिश का ऐसा ही क्रम रहा तो जहां गेंहू की फसलें पीली पड़ने लगेगी, वहीं पौध में ताकत न होने से हवा चलने की सूरत में फसलें गिर जाएगी जिससे किसानों को भारी नुकसान होगा। कृषि विषयवाद विशेषज्ञ डॉ. प्रेम ठाकुर ने कहा कि बारिश का यह क्रम फसलों के लिए नुकसानदायक है, इसलिए किसान खेतों में से पानी निकासी का प्रबंध करें। गेंहू की फसल में टिलट की स्प्रे करें। नौणी विवि के पर्यावरण विज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ. एसके भारद्वाज के मुताबिक 15 मार्च को गरज के साथ हल्की बौछारें गिरने की संभावनाएं हैं।
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