सोलन। टमाटर का करीब डेढ़ अरब कारोबार करने वाले जिले के किसानों की कमर ओलावृष्टि ने तोड़ डाली। 48 घंटों के दौरान हुई ओलावृष्टि से अब तक करीब 65 फीसदी टमाटर की फसल बर्बाद हो चुकी है। किसानों ने बैंकों से ऋण लेकर टमाटर की पैदावार की थी और वह अब पूरी तरह से कंगाल हो चुके हैं। कृषि विभाग टमाटर से हुए कुल नुकसान के आकलन में जुटा है।
अब तक करीब तीन करोड़ 75 लाख रुपये के नुकसान की पुष्टि हो चुकी है। यह नुकसान नई पौध के रूप में हुआ है। सोलन में उन्हीं जगहों पर सर्वाधिक ओलावृष्टि हुई है जहां टमाटर को किसान मुख्य फसल के रूप में बीजते हैं। जिले में कुल 4414 हेक्टेयर भूमि पर टमाटर उगाया जाता है। सोलन के टमाटर बरसात के दौरान तैयार होकर निकलते हैं। यह वो समय है जब मैदानी इलाकों में बारिश की वजह से टमाटर की फसल तबाह हो जाती है। यहां के किसानों को फसल के उम्दा दाम मिल जाते हैं। पिछले साल सोलन का टमाटर 100 रुपये प्रति किलोग्राम तक बिका था। इसी वजह से यहां के किसानों ने डेढ़ अरब का कारोबार कर पूरे प्रदेश में रिकॉर्ड कायम किया था। लेकिन इस बार फसल बर्बाद हो गई है। करीब 1200 हेक्टेयर क्षेत्र में अन्य नगदी फसलों की बिजाई की जाती है। ओलावृष्टि से फसलों पर करीब 20 प्रतिशत प्रभाव पड़ा है। कृषि विभाग नुकसान की विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर रहा है। इसे राज्य और केंद्र सरकार को भेजा जाएगा। किसान मोर्चा प्रभारी देवेंद्र ठाकुर और आढ़ति समिति के अध्यक्ष अमर सिंह ठाकुर ने कहा कि ओलावृष्टि से किसान बर्बाद हो गए हैं। सरकार को उनकी मदद के लिए हाथ बढ़ाने होंगे। किसानों ने बैंक से कर्ज लेकर टमाटर की खेती की थी।
33 प्रतिशत नुकसान पर मदद करेगा केंद्र
ओलावृष्टि से हुए नुकसान का आकलन कुल फसल का 33 प्रतिशत होता है तो केंद्र सरकार सीधे मदद के लिए हाथ बढ़ाती है। केंद्र से मिलने वाली मदद को कृषि विभाग के माध्यम से किसानों को उपलब्ध करवाया जाता है। सोलन में कृषि विभाग ने 65 प्रतिशत नुकसान का आकलन किया है लेकिन यह नुकसान चुनिंदा इलाकों में हुआ है। इस नुकसान कुल लागत से जोड़कर विभाग सही आकलन करेगा और नुकसान 33 प्रतिशत को पार करता है तो केंद्र से आर्थिक मदद मिलेगी।
सोलन, धर्मपुर और कंडाघाट में भारी नुकसान
ओलावृष्टि से सोलन, धर्मपुर और कंडाघाट ब्लॉक में सर्वाधिक नुकसान हुआ है। ओलावृष्टि का ज्यादा असर पहाड़ी क्षेत्र में पड़ा है। मैदानी भाग जिनमें बीबीएन का हिस्सा शामिल है वहां ओलावृष्टि नहीं हुई है। इसकी वजह से निचले क्षेत्र में उगने वाली नकदी फसल प्रभावित नहीं हुई है। कृषि विभाग अब तक 375 लाख रुपये के नुकसान का आकलन कर चुका है। इसकी रिपोर्ट उपायुक्त कार्यालय को भेजी है।
राज्य और केंद्र को भेजी रिपोर्ट : विभाग
कृषि विभाग अधिकारी सीमा कंसल ने कहा कि 4414 हेक्टेयर भूमि पर टमाटर उगाया जाता है। ज्यादातर टमाटर पहाड़ी क्षेत्र में होता है। इन दिनों टमाटर शुरुआती दौर में था। लेकिन जहां ओलावृष्टि हुई है वहां टमाटर पूरी तरह नष्ट हो चुका है। किसानों को भारी नुकसान का सामना करना पड़ा है। इसकी रिपोर्ट जिला प्रशासन के माध्यम से राज्य और केंद्र सरकारों को भेजी जा रही है।