दाड़लाघाट (सोलन)। अर्की के लोगों को तोहफे में मिला सौ बिस्तर का अस्पताल अब छलावा सा लगने लगा है। भवन पर करोड़ों रुपये खर्च किए गए हैं लेकिन विशेषज्ञ चिकित्सकों और सस्ती जेनरिक दवाइयों जैसी मूलभूत सुविधाएं अभी तक लोगों को नहीं मिल पाई हैं। मरीजों को महंगे दामों पर दवाइयां खरीदनी पड़ रही हैं।
मौजूद समय में अस्पताल में शिशु रोग, अस्ति रोग, नेत्र और गला रोग विशेषज्ञों के पद खाली पड़े हैं। डॉक्टरों के स्वीकृत 15 पदों में से सिर्फ 8 ही भरे गए हैं। सुविधाओं और विशेषज्ञों की कमी के चलते लोग महंगी निजी लैबों तथा नर्सिंग होम पर मजबूर हैं। परिवार नियोजन ऑपरेशनों के लिए भी भीड़ ज्यादा होती है। इससे मरीजों के साथ चिकित्सकों की भी परेशानी बढ़ जाती है। यह अस्पताल बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के सरकारी दावों की पोल खोल रहा है। इतने बड़े अस्पताल में मरीजों और उनके तीमारदारों के बैठने के लिए बैंच तक नहीं हैं। मरीजों और उनके तीमारदारों को जमीन पर बैठे देखा जा सकता है। यहां लाखों रुपये की अल्ट्रासाउंड मशीन तो लगी है लेकिन रेडियोलॉजी के डॉक्टर का पद खाली पड़ा है। दो वर्षों से एक ही रेडियोलॉजिस्ट के कंधों पर व्यवस्था हांकी जा रही है। आपातकालीन परिस्थितियों और शाम चार बजे के बाद एक्सरे करवाना संभव नहीं हो पाता है। उचित मूल्य की दवाइयों की दुकान पर चार सालों से ताला लटका है। टेंडर न हो पाने सस्ती और जेनरिक दवाइयों की सुविधा से लोग वंचित हैं। लोगों को बाहर से महंगी दवाएं खरीदनी पड़ रही हैं।
विशेषज्ञों को लिखा है पत्र : बीएमओ
खंड चिकित्सा अधिकारी ताराचंद नेगी ने कहा कि निजी कंपनी एक्सरे मशीन को बदलेगी। इसे जल्द बदलवाने का प्रयास किया जा रहा है। विशेषज्ञों के खाली पड़े पदों को भरने के लिए उच्च अधिकारियों को लिखा हैै। टेंडर अवार्ड होने के बाद ही सस्ती दवाओं की दुकान खुल पाएगी।