सोलन। बच्चों की सुरक्षा और प्रशासनिक आदेशों को दरकिनार करते हुए सोलन में निजी स्कूल संचालकों ने छात्रों को छुट्टी नहीं दी। भारी बारिश के बीच बच्चे स्कूल पहुंचे और छुट्टी के बाद अभिभावक कड़ी मशक्कत के बाद उन्हें घर ले गए। भारी बारिश में भीगते हुए बच्चे घरों तक पहुंचे जिस पर अभिभावकों ने स्कूल प्रबंधन के खिलाफ कड़ी नाराजगी जताई है।
इससे पहले देर शाम उपायुक्त कार्यालय ने सभी स्कूलों को बंद रखने के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद जिला मुख्यालय के दो निजी स्कूलों ने छात्रों को छुट्टी नहीं दी। इन छात्रों को भारी बारिश के बीच स्कूल बुलाया गया और बच्चों से कक्षाएं लगवाईं। मालरोड स्थित एक निजी स्कूल ने परीक्षा का हवाला देकर बच्चों को बैठाए रखा। जबकि मालरोड पर स्थित एक अन्य निजी स्कूल ने पूरा दिन कक्षाएं चलाईं।
इस मौके पर सुबह भारी बारिश के बीच बच्चों को स्कूल छोड़ने व छुट्टी के बाद उन्हें घर ले जाने में अभिभावकों को भारी परेशानी से गुजरना पड़ा। आलम यह रहा कि भारी बारिश के बीच बच्चे भीगते हुए घरों को निकले। मौसम विभाग की चेतावनी को देखते हुए उपायुक्त ने जिला भर के शैक्षणिक संस्थानों को बंद रखने के निर्देश दिए थे। सरकारी व निजी शैक्षणिक संस्थान बंद रहे लेकिन जिला मुख्यालय में नियम पूरे नहीं हो पाए।
गौरतलब है कि इससे पूर्व पिछली बार चेतावनी देरी से जारी होने की वजह से परवाणू के जाबली में एक छात्र की स्कूल जाते समय नाले मेें बह जाने से मौत हो गई थी। छात्र का शव करीब एक सप्ताह बाद हरियाणा में कौशल्या डैम से बरामद हुआ था। जिस दिन छात्र की मौत हुई उस दिन भी स्कूलों में छुट्टी घोषित थी। लेकिन छुट्टी के एलान में देरी से अभिभावकों तक इसकी जानकारी नहीं पहुंची और छात्र के दादा उसे स्कूल छोड़ने जा रहे थे। नाले में छात्र का पांव फिसला और वह बहाव में लापता हो गया। इस बार एहतियात के तौर पर प्रशासन ने रविवार शाम को ही जिला में शैक्षणिक संस्थान बंद रखने का एलान कर दिया था।
स्कूल संचालक होंगे जिम्मेदारी : उपायुक्त
उपायुक्त विनोद कुमार का कहना है कि प्रशासन ने अवकाश की घोषणा की थी। इसके बावजूद यदि कुछ स्कूल संचालकों ने संस्थान खुले रखे हैं तो यह उनका अपना जोखिम है। कोई हादसा होता है तो इसकी पूरी जिम्मेदारी स्कूल प्रबंधन की होगी। उन्होंने बताया कि प्रशासन ने रविवार शाम को ही अवकाश की घोषणा कर सभी शैक्षणिक संस्थान बंद रखने के निर्देश जारी किए थे।