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परवाणू से कैंथलीघाट तक 750 परिवारों को नहीं मिला मुआवजा, करोड़ों रुपये का भुगतान फंसा

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- फोटो : Demo Pic.
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परवाणू से कैंथलीघाट तक 750 परिवारों को नहीं मिला मुआवजा, करोड़ों रुपये का भुगतान फंसा
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फोरलेन में बेघर हुए परिवारों के पास न रहने को ठिकाना और न ही घर
66 किलोमीटर लंबे मार्ग में बैंक विवाद, अधूरे प्रमाण और कोर्ट की वजह से फंसी मुआवजा राशि
राकेश शर्मा
सोलन। शिमला-चंडीगढ़ के बीच फर्राटेदार फोरलेन मार्ग की नींव पक्की नहीं हो पा रही है। मार्ग पर करोड़ों की देनदारी अब भी बकाया है। मुआवजा हासिल करने के लिए लोग रोजाना प्रशासनिक कार्यालयों की दहलीज तक पहुंच रहे हैं। लेकिन विवादित मामलों की श्रेणी में आए करीब 750 मामलों में मुआवजे के वितरण पर कोई फैसला नहीं हो पाया है।
परवाणू से कैंथलीघाट तक 66 किलोमीटर लंबे मार्ग को फोरलेन में बदला जा रहा है। इसमें पहले चरण में करीब 41 किलोमीटर लंबे मार्ग का काम काफी समय से शुरू हो गया है। जबकि चंबाघाट से कैंथलीघाट तक करीब 25 किलोमीटर लंबे मार्ग के टेंडर हो चुके हैं। लेकिन मार्ग के निर्माण से पूर्व मुआवजे को लेकर कई बड़े पेंच फंस गए हैं। इससे निर्माण कार्य शुरू होने में देरी के आसार लगातार बनते दिख रहे हैं। चंबाघाट से कैंथलीघाट के बीच जमीन गंवाने वाले करीब 476 परिवारों को मुआवजे के एवज में मिलने वाली धनराशि का भुगतान अभी तक नहीं हो पाया है। इनमें से एक बड़ी संख्या ऐसे परिवारों की है जो अभी तक अपने दुरुस्त प्रमाण राजस्व विभाग को प्रस्तुत नहीं कर पाए हैं। करीब 260 मामलों में भू मालिकों के प्रमाण पूरे नहीं हैं। इन सभी को 19 करोड़ 14 लाख 15 हजार 454 रुपये का भुगतान किया जाना है। लेकिन जब तक जमीन के पंजीकरण से जुड़े प्रमाण प्रस्तुत नहीं होंगे इन्हें मुआवजा राशि वितरित नहीं की जाएगी। इतना ही नहीं फोरलेन पर एक और विकराल समस्या उन परिवारों की भी है जिन्होंने नेशनल हाईवे के फोरलेन में बदलने से पूर्व ही जमीन पर ऋण ले लिया था। इनकी जमीन बैंक के अधीन है। चंबाघाट से कैंथलीघाट तक के मार्ग में नौ ऐसे मामले हैं जिनमें दो करोड़ 87 लाख 54 हजार 353 रुपये का भुगतान किया जाना है। लेकिन इस भुगतान पर अब बैंक भी अपना अधिकार जता रहा है। दोनों पक्षों के बीच तनाव की वजह से राजस्व विभाग ने ऐसे सभी मामलों को विवादित घोषित करते हुए फिलहाल मुआवजे पर रोक लगा दी है। इसी तर्ज पर करीब 20 करोड़ रुपये से ज्यादा के 200 से अधिक मामले ऐसे हैं जिनमें संपत्ति विवाद को लेकर दोनों पक्ष कोर्ट चले गए हैं। इन परिवारों की जमीन का अधिग्रहण एनएचएआई प्रबंधन राजस्व विभाग के माध्यम से कर चुका है। लेकिन परिवार के किसी भी सदस्य को मुआवजे की राशि का वितरण नहीं किया गया है। जमीन गंवाने के बावजूद मुआवजा न मिल पाने की वजह से रोजाना कई लोग एसडीएम कार्यालय के चक्कर काट रहे हैं।
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चंबाघाट-परवाणू के बीच लटका साढ़े 32 करोड़ का भुगतान
परवाणू से चंबाघाट के बीच 32 करोड़ 51 लाख 69 हजार 407 रुपये का भुगतान अब तक लोगों को नहीं हो पाया है। फोरलेन के इस हिस्से पर सर्वाधिक 140 मामलों में संपत्ति के मालिक कोर्ट चले गए हैं। जिन्हें एनएचएआई प्रबंधन की ओर से 14 करोड़ 32 लाख 58 हजार 118 रुपयों का भुगतान किया जाना है। करीब 12 करोड़ 30 लाख रुपये के मामले संपत्ति बैंक के अधीन होने की वजह से लंबित हो गए हैं। चंबाघाट-परवाणू के बीच फोरलेन में 130 मामलों में आठ करोड़ 29 लाख 34 हजार 158 रुपये का भुगतान ऐसा है जिनके मालिक अभी तक जरूरी प्रमाण नहीं दे पाए हैं।
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नियमों के आधार पर वितरित होगा मुआवजा : एसडीएम
एसडीएम रोहित राठौर का कहना है कि मुआवजा नियमों के आधार पर ही वितरित किया जाएगा। भूमि का अधिग्रहण कर लिया गया है और भूमि के हिसाब से जो मुआवजा राशि बनती है उसे जमा कर लिया गया है। जैसे ही इन लोगों के बीच चल रहे विवाद खत्म होंगे मुआवजा राशि वितरित कर दी जाएगी। जो मामले कोर्ट में विचाराधीन हैं उनमें फैसला आने पर जो मालिक तय होगा उसे ही भुगतान किया जाएगा। जबकि बैंक के ऋण संबंधित मामलों में अभी तक कोई फैसला नहीं किया गया है।
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