जम्मू-कश्मीर और युरोपियन सेब भी देगा दस्तक
उचित सेटिंग और कम फ्लावरिंग होने से मंडी में सेब कम पहुंचने का आसार
दो सालों में 50 लाख और 32 लाख सेब के पेटियां पहुंची थीं मंडी में
अमर उजाला ब्यूरो
सोलन। इस बार फ्लावरिंग कम होने और उचित सेटिंग न होने की वजह से मंडी में सेब की कम पेटियां पहुंचने का अनुमान लगाया जा रहा है। यदि आंकड़ों पर नजर दौड़ाई जाए तो पिछले दो सालों की तुलना में इस बार सेब कम है। मौजूदा तारीख में सोलन और परवाणू की सेब मंडी में कुल 2800 सेब की पेटियां पहुंची हैं। अभी तक इन मंडियों में कई किस्मों का सेब आ चुका है। इनमें रेड जून, टाइड मैन, ग्रीन स्मिथ, रेड गोल्डन है। इनमें से रॉयल डिलिशियस सेब चल पड़ा है। इसी के साथ स्पर किस्म का सेब भी मंडी में आ चुका है। हालांकि अभी तक जो सेब मंडियों में आ रहा है, वह 5500 से 6000 फीट की मिड हिल्स से आ रहा है। अनुमान यह भी लगाया जा रहा है कि अब बारिशों के चलते सेब का साइज बढ़ने की भी पूरी संभावना जताई जा रही है। साथ ही अब जैसे ही मौसम साफ होगा, वैसे ही व्यापारियों की होड़ लग जाएगी। यही नहीं मंडियों में आने वाला सेब पूरे उत्तरी भारत तक जाता है।
यदि पिछले दो सालों के आंकड़ों पर नजर दौड़ाई जाए तो पिछली बार सेब मंडी में 32 लाख सेब की पेटियां पहुंची थीं। उससे एक वर्ष पहले 50 लाख सेब के बॉक्स इन मंडियों में पहुंचे थे। इस बार कम सेब पहुंचने का अंदेशा भी लगाया जा रहा है। इसके पीछे सेब की उचित सेटिंग न होना भी माना जा रहा है।
इस सेब के आने के बाद अब सेब मंडियों में जम्मू-कश्मीर का सेब सिंतबर के महीने में दस्तक दे देगा। इसके अलावा नवंबर महीने में युरोपियन देशों का सेब भी आना शुरू हो जाएगा। स्पर किस्म का सेब आ चुका है। लेकिन, इसमें टेस्ट हल्का और टिकाऊपन कम होता है।
मंडी समिति सोलन के सचिव प्रकाश कश्यप ने बताया कि इस बार मंडियों में सेब कम आने का अनुमान लगाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि सेब में कम फ्लॉवरिंग और सेटिंग न होने से 20-25 लाख के करीब ही सेब पहुंचने का अनुमान है। कश्यप ने बताया कि अभी तक सोलन और परवाणू सेब मंडी में 2800 बॉक्स ही आए हैं।