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हिमाचल: 160 दुर्लभ मशरूम मिलीं, अब खुलेगा बड़ा राज; कौन सी खाने योग्य और कौन सी जहरीली, वैज्ञानिक करेंगे पहचान

Sun, 06 Sep 2026 09:31 AM IST
Ankesh Dogra ललित कश्यप, सोलन।

सार

सोलन के खुंब अनुसंधान निदेशालय ने देशभर के जंगलों से इस वर्ष 160 दुर्लभ जंगली मशरूम प्रजातियों के नमूने एकत्रित किए हैं। अब वैज्ञानिक इनकी पहचान कर पता लगाएंगे कि इनमें कौन सी खाने योग्य, जहरीली, औषधीय गुणों वाली और व्यावसायिक खेती के लिए उपयोगी हैं।
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जंगलों में मिली मशरूम। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार
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भारत में प्राकृतिक संपदा और जैव विविधता का बड़ा खजाना छिपा हुआ है, जिसे सहेजने और समझने के लिए खुंब अनुसंधान निदेशालय सोलन (डीएमआर) प्रयासरत है। डीएमआर ने इस वर्ष देश के विभिन्न हिस्सों और जंगलों से 160 दुर्लभ जंगली मशरूम प्रजातियों को एकत्रित किया है। मशरूम की अनुवांशिक संपदा (जर्मप्लाज्म) को भावी पीढ़ियों और शोध कार्यों के लिए सुरक्षित रखने के लिए दो प्रमुख जीन बैंक कार्य कर रहे हैं। इसमें उत्तर प्रदेश के मऊ स्थित नेशनल ब्यूरो ऑफ एग्रीकल्चरली इम्पोर्टेंट माइक्रोऑर्गेनिज्म और सोलन स्थित डीएमआर के जीन बैंक में कुल मिलाकर करीब 4,500 मशरूम प्रजातियों के जर्मप्लाज्म सुरक्षित रखे गए हैं।

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अब वैज्ञानिकों की टीम इस बात का अध्ययन कर रही है कि इनमें से कितनी प्रजातियां खाने योग्य हैं और कौन सी जहरीली या औषधीय गुणों से भरपूर हैं। वैज्ञानिक शोध के जरिये इनकी पोषण क्षमता, औषधीय उपयोगिता और व्यावसायिक कृषि की संभावनाओं को भी तलाशा जा रहा है। देशभर में करीब 15,000 जंगली  मशरूम प्रजातियों में से अभी तक केवल 3,000 प्रजातियों की पहचान ही खाने योग्य की श्रेणी में हो पाई हैं। जंगली मशरूम में कई जहरीली प्रजातियां भी होती हैं, जिनकी वजह से हर साल ग्रामीण इलाकों में अनजाने में  सेवन करने से दुर्घटनाएं सामने आती हैं। वैज्ञानिक परीक्षणों के माध्यम से खाने योग्य और जहरीली प्रजातियों के बीच स्पष्ट अंतर स्थापित किया जा रहा है, जिससे जनसामान्य को जागरूक किया जा सके और नई व्यावसायिक किस्मों का विकास संभव हो सके।

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इन सुरक्षित सैंपलों की मदद से जलवायु परिवर्तन के अनुकूल और उच्च गुणवत्ता वाली नई मशरूम किस्मों को विकसित करने में मदद मिलेगी। इस वर्ष 160 जंगली मशरूम को एकत्रित किया गया है। अब इसकी पहचान को लेकर शोध शुरू किया जा रहा है। लोगों को सलाह दी है कि जंगली मशरूम के बारे में पता न हो तो इनका इस्तेमाल करने से बचा जाए, अन्यथा यह जानलेवा हो सकता है। -डॉ. बृज लाल अत्री, कार्यकारी निदेशक खुंब अनुसंधान निदेशालय सोलन
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