अमर उजाला ब्यूरो
परवाणू (सोलन)। प्रदेश में मजदूरों की न्यूनतम वेतन लागू करने की अधिसूचना छह महीने का समय बीतने के बाद भी जारी नहीं हो सका है। इस कारण प्रदेश में निजी क्षेत्रों में कार्यरत मजदूरों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है। न्यूनतम वेतन बढ़ाने की घोषणा होने के करीब छह माह बाद भी मजदूरों को करीब 6750 रुपये ही न्यूनतम वेतन मिला। हैरानी की बात यह है कि बढ़ाया गया वेतन प्रदेश सरकार ने अप्रैल माह से लागू करने की बात कही थी लेकिन अभी तक ऐसा नहीं हो सका है।
जानकारी के अनुसार 26 जनवरी को प्रदेश के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने प्रदेश में कार्यरत मजदूरों का न्यूनतम वेतन 225 रुपये प्रतिदिन से बढ़ाकर 250 रुपये और 6750 रुपये से बढ़ा कर 7500 रुपए प्रति महीना करने की घोषणा की थी। इस घोषणा के तहत इसे अप्रैल माह से लागू किया जाना था। इस घोषणा के बाद प्रदेश के उद्योगों में कार्यरत मजदूरों ने राहत की सांस ली थी लेकिन अभी तक उद्योगों में कार्यरत मजदूरों में मायूसी छाई हुई है।
परवाणू के उद्योगों में कार्यरत मजदूर शशि ठाकुर, रबी कुमार, वीरेंद्र कुमार, नरेंद्र पंडित, रामदुलारे, टेक चंद का कहना है कि कि प्रदेश में मजदूरों की बढ़ाई न्यूनतम वेतन की अधिसूचना न होने से ज्यादातर उद्योग यह कह कर की अभी अधिसूचना जारी नहीं हुई है। इसलिए पुराना वेतन ही दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रदेश से काफी उद्योग यहां अपना कारोबार बंद करके दूसरे प्रदेशों में चले गए है लेकिन अप्रैल माह से मजदूरों को एरियर भी नहीं दिया गया है। प्रदेश में चल रहे उद्योग अभी भी अधिसूचना न होने का बहाना कर बढ़ा हुआ न्यूनतम वेतन नहीं दे रहे हैं। श्रम निरीक्षक अमित ठाकुर ने बताया कि परवाणू सरकारी क्षेत्र में अधिसूचना जारी की गई है। सिर्फ निजी क्षेत्र में अधिसूचना होना बाकी है। यह सरकार का मामला है और जल्द ही अधिसूचना जारी होने की उम्मीद है।
कम वेतन कैसे होगा गुजारा
प्रदेश के सबसे पुराने औद्योगिक क्षेत्र परवाणू में अभी तक 6750 रुपये प्रति माह के हिसाब से वेतन दिया जा रहा है लेकिन एक कमरे का किराया ही 3000 से 4500 रुपए है। ऐसे में मजदूरों को अपना गुजारा करना नामुमकिन सा प्रतीत हो रहा है।
मजदूरों को हो रहा आर्थिक नुकसान : मजदूर संघ
हिमाचल प्रदेश इंटक के प्रदेश अध्यक्ष यशपाल ठाकुर और हिमाचल प्रदेश एटक के प्रदेशाध्यक्ष जगदीश भारद्वाज का कहना है कि मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर की न्यूनतम वेतन 6750 से बढ़ाकर 7500 रुपये करने की घोषणा को छह महीने बीतने के बाद भी अधिसूचना जारी नहीं हो पाई है। इससे उद्योगों में कार्यरत मजदूरों में मायूसी है। उन्होंने कहा कि अधिसूचना जारी न होने से ज्यादातर उद्योग मजदूरों को बढ़ाया हुआ न्यूनतम वेतन नहीं दे रहे हैं।