अमर उजाला ब्यूरो
बद्दी (सोलन)। झाड़माजरी में हवा में केमिकल छोड़कर लोगों की जान जोखिम में डालने वाले दवा उद्योग के खिलाफ लोगों ने एफआईआर दर्ज करने की मांग उठाई है। पीड़ित ग्रामीणों ने हस्ताक्षर युक्त शिकायत पुलिस थाना बरोटीवाला के माध्यम से एसपी बद्दी को सौंपी। लिखित शिकायत में सुरेंद्र रघुवंशी, रमन कुमार, सतपाल, ओम प्रकाश शर्मा, रेखा शर्मा, शर्मिला, दीपक कुमार, गौरव समेत दर्जनों प्रभावित ग्रामीणों ने बताया कि सात जून की रात को करीब 10 बजे एक फार्मा कंपनी ने किसी तरह कोई केमिकल हवा में छोड़ा।
इससे सभी लोगों की आंखों में जलन होने लगी, आंसू निकलने लगे और दम घुटना शुरू हो गया। इसके बाद ग्रामीणों ने मामले की सूचना पुलिस, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और ड्रग विभाग को दी। ग्रामीणों ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि जब रात ड्रग इंस्पेक्टर डॉ. कमलेश नायक मौके पर पहुंचे तो कंपनी ने जांच में सहयोग नहीं किया। जिस समय यह हादसा पेश आया, कंपनी में कोई भी तकनीकी कर्मचारी, प्लांट हेड और कोई जिम्मेदार व्यक्ति मौजूद नहीं था।
ग्रामीणों ने बताय कि जब ड्रग विभाग ने पूछताछ की तो कंपनी के अंदर किसी को पता नहीं था कि क्या समस्या है। ग्रामीणों ने पूछा कि अगर कंपनी प्रबंधन की लापरवाही से कोई बड़ा हादसा होता है तो इसका जिम्मेदार कौन होगा। ग्रामीणों ने शिकायत से एसपी बद्दी से मांग उठाई कि उद्योग पर लापरवाही और लोगों की जान जोखिम में डालने पर केस दर्ज किया जाए। एसपी बद्दी रोहित मालपानी ने बताया कि पुलिस ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और ड्रग विभाग को मामले की रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश जारी किए हैं। जैसे ही दोनों विभागों की रिपोर्ट आएगी, उसी आधार पर उद्योग पर कार्रवाई की जाएगी।
उद्योग के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई तो सड़कों पर उतरेंगे लोग
पुलिस की दी शिकायत में सुरेंद्र रघुवंशी, रमन कुमार, सतपाल, ओमप्रकाश शर्मा, रेखा शर्मा, शर्मिला, दीपक कुमार, गौरव, ममता, ऊषा, रणवीर, सूरज, अमर सिंह, प्रेमवती, सतीश, रजनी गौतम, राजीव, रोहित, रजन ठाकुर, शिवम, विकास, रवि, दीपक, शिवम, अंकित, विरु, अशोक, अदनीश, शिव पूजन, मोहित, अभिषेक, देशराज, ममता, अजय, सुरेश, महेश, लता शर्मा, प्रदीप, पवन, रत्न, राम रत्न, पवन, खुशबू, रमीत ने ने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि अगर ड्रग विभाग, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और पुलिस ने उद्योग पर कार्रवाई नहीं की तो उन्हें मजबूरन सड़कों पर उतरना पड़ेगा। अगर इतनी बड़ी लापरवाही और सैकड़ों लोगों की जान जोखिम में डालने के बाद भी उद्योग पर कार्रवाई नहीं होती तो लोग न्यायालय और एनजीटी का दरवाजा खटखटाने से गुरेज नहीं करेंगे।