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सोलन में स्वास्थ्य विभाग फेल, डेंगू का आंकड़ा डेढ़ हजार के करीब

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स्वास्थ्य विभाग के दावे फेल, डेंगू का आंकड़ा डेढ़ हजार पार
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सोलन में अब तक डेंगू से तीन मरीजों की मौत, रोज उपचार को पहुंच रहे 3-5 मरीज
अब तक परवाणू, बद्दी, नालागढ़, सोलन और सुबाथू में सामने आए डेंगू के मरीज
अमर उजाला ब्यूरो
सोलन। लंबी तैयारियों और भारी-भरकम बजट लेकर डेंगू से निपटने के स्वास्थ्य विभाग के दावे फेल साबित हुए हैं। जिला में इस बार डेंगू के मरीजों का आंकड़ा पिछले सारे रिकॉर्ड तोड़कर डेढ़ हजार तक पहुंच चुका है। सोलन में डेंगू मरीजों की अब तक की सबसे बड़ी संख्या है। जिले में डेंगू की वजह से तीन मरीजों की मौतें भी हो चुकी हैं। जिला में इस बार डेंगू के सर्वाधित मामले औद्योगिक क्षेत्रों से सामने आए हैं जिनमें परवाणू पहले नंबर पर है। यहां डेंगू मरीजों का आंकड़ा एक हजार को पार कर गया है। परवाणू में डेंगू पीड़ित 1025 मरीजों की पंजीकरण हो चुका है और नियमित रूप से 3-5 मरीज रोजाना ही उपचार के लिए अभी भी परवाणू अस्पताल पहुंच रहे हैं। हालांकि, परवाणू में डेंगू के मरीजों की संख्या बढ़ाने में हरियाणा के कालका से आने वाले मरीज भी बड़ी तादाद में शामिल हैं। कालका से परवाणू उपचार के लिए करीब 400 डेंगू पीड़ित आ चुके हैं। जिन मरीजों की डेंगू से मौत हुई है, उनमें से दो कालका जबकि एक परवाणू का मरीज शामिल है। बीबीएन में भी डेंगू के मामले बड़ी तेजी से बढ़ रहे हैं। यहां अभी तक 353 मरीजों का पंजीकरण हो चुका है। इनमें से बद्दी में 260 जबकि नालागढ़ में 93 मरीज पंजीकृत हुए हैं। यहां भी हालात परवाणू की तरह ही हैं, डेंगू पीड़ित मरीजों की आवाजाही कम होने का नाम नहीं ले रही है। सोलन शहर के आसपास के क्षेत्रों जिनमें छावनी बोर्ड सुबाथू भी शामिल हैं। अब तक करीब 40 मरीजों की डेंगू पीड़ित होने की पुष्टि हुई है।
स्वास्थ्य विभाग नियमित रूप से बना रहा डाटा : डॉ. एनके गुप्ता
डेंगू से मरने वालों का सही आंकड़ा स्वास्थ्य विभाग के पास मौजूद नहीं है। जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. एनके गुप्ता का कहना है कि नियमित रूप से डेंगू पीड़ित मरीजों का आंकड़ा एकत्र किया जा रहा है। जिला में अभी डेंगू से किसी भी मरीज की मौत नहीं हुई है। जिला के परवाणू में उपचार करवा चुके तीन मरीजों की मौत का खुलासा निचले स्तर के अधिकारी कर चुके हैं।
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डेंगू पर नियंत्रण में स्वास्थ्य विभाग विफल
स्वास्थ्य विभाग ने डेंगू से निपटने की तैयारियां और जरूरी बैठकें बरसात से पहले शुरू कर दी थीं। औद्योगिक क्षेत्रों व संदिग्ध जगहों पर फॉगिंग और जागरूकता कार्यक्रम भी नियमित रूप से चलाए गए। विभाग ने उद्योगों का दौरा कर स्वच्छता नियम पूरे न करने वालों का चालान भी काटा। इस सब के बावजूद डेंगू नियंत्रित नहीं हो पाया है। इस समय जिला में डेंगू पीड़ितों की संख्या लगातार बढ़ रही है।
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परवाणू में गंदगी से पैदा हो रहे मच्छर
परवाणू में डेंगू के एक हजार से ज्यादा मामले सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने ठिकरा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड पर फोड़ने की तैयारी कर ली है। क्षेत्र में सर्वाधिक मामले टकसाल क्षेत्र से आए हैं और यह क्षेत्र गंदगी से लदा पड़ा है। यहां पेयजल सप्लाई नियमित नहीं है। झुग्गी-झोपड़ी में रहने वाले लोग कई दिनों तक पानी को स्टोर करके रखते हैं। स्टोर किए इसी पानी में डेंगू के मच्छर का लार्वा तैयार हो रहा है।
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