सीएम के आश्वासन के बाद भी नहीं मिला चिकित्सक,अल्ट्रासाउंड मशीन भी फांक रही धूल
नीय कई पंचायतों के प्रतिनिधियों ने दी आंदोलन की चेतावनी
संवाद न्यूज एजेंसी
चायल (सोलन)। पर्यटन नगरी चायल का सिविल अस्पताल इन दिनों खुद बदहाली के आंसू रो रहा है। करीब 15 हजार की स्थानीय आबादी और हर साल आने वाले पर्यटकों के स्वास्थ्य का जिम्मा संभालने वाले इस अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह चरमरा गई हैं। अस्पताल में मात्र एक महिला चिकित्सक तैनात हैं, जिन पर दिन-रात की सेवाओं के साथ रोजाना 80 से 100 मरीजों की ओपीडी का भारी बोझ है। हैरानी की बात यह है कि समाजसेवी पंकज ठाकुर की ओर से अस्पताल को दान की गई 8 लाख रुपये की अल्ट्रासाउंड मशीन भी धूल फांक रही है। मशीन चलाने के लिए कोई नियमित रेडियोलॉजिस्ट नहीं है। जो रेडियोलॉजिस्ट यहां कार्यरत था, वह भी डेपुटेशन पर था। स्थानीय जनता इस मांग को लेकर मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू से भी मिल चुकी है, लेकिन आश्वासन के बावजूद अब तक नियमित चिकित्सक की नियुक्ति नहीं हुई। अस्पताल की दुर्दशा से गुस्साए स्थानीय प्रतिनिधियों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। चायल की प्रधान ऊषा शर्मा, उपप्रधान पंकज ठाकुर, भाजपा नेता जोगिंद्र वर्मा और अन्य प्रधानों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही डॉक्टरों के रिक्त पद नहीं भरे गए, तो ग्रामीण उग्र आंदोलन करेंगे और स्वास्थ्य मंत्री का पुतला फूंका जाएगा।
12 पंचायतें और 200 होटल एक ही अस्पताल के भरोसे
चायल अस्पताल पर सोलन और शिमला जिला की करीब 12 पंचायतों (नगाली, बाजनी, सकोड़ी, हिन्नर, रहेड, झाजा, दंगील, चायल, बलोग, जनेडघाट, कोटी और सतलाई) का दारोमदार है। इसके अलावा क्षेत्र के 200 होटलों में रुकने वाले पर्यटक और दर्जनों स्कूलों के बच्चे भी उपचार के लिए इसी अस्पताल पर निर्भर हैं।
कोट
अस्पताल में चिकित्सकों के दो पद स्वीकृत हैं। हाल ही में एक चिकित्सक का तबादला सोलन हुआ है। अल्ट्रासाउंड चिकित्सक पहले भी डेपुटेशन पर ही सेवाएं दे रहे थे। रिक्त पदों को भरने का मामला उच्चाधिकारियों के ध्यान में है।
-डॉ. अजय पाठक, सीएमओ सोलन