धर्मपुर (सोलन)। कालका-शिमला नेशनल हाइवे को फोरलेन में बदलने के लिए चल रहे निर्माण कार्य की ज़द में आए धर्मपुर बाजार के बाद अब चंबाघाट बाजार भी उखड़ जाएगा। धर्मपुर बाजार में अधिकतर दुकानों और भवन को उखाड़ा जा चुका है। सड़क के एक तरफ मलबे के ढेर लगे हैं। कभी यहां आलीशान ढाबे और दुकानें हुआ करतीं थीं लेकिन आज सब खंडहर में बदल चुका है। शाम ढलते ही जिस बाजार में रौनक हुआ करता थी अब सनाटा सा पसर जाता है।
फोरलेन की जद में आए भवनों को तोड़ने का काम शनिवार को भी जारी रहा। धर्मपुर बाजार में लगभग सभी दुकानों को तोड़ दिया गया है। लेकिन कुछ ऐसे भवन भी हैं जिन भवनों के मुआवजे के पैसे अभी तक नहीं मिले हैं। ऐसे भवनों को अभी नहीं तोड़ा है। इन भवनों के मालिक सुरेंद्र गोयल, दि कंडा सोसायटी, दिव्या जैन, तिलकराज और गुरबख्श सिंह हैं।
फोरलेन में प्रभावित होने वाले दुकानदारों में करीब 60 किरायेदार थे। किरायदारों का भविष्य अब अंधकार में हो गया है। इन लोगों ने धर्मपुर बाजार में किराये पर दुकानें ली थीं लेकिन अब फोरलेन में दुकानें उजड़ने के कारण ये बेरोजगार हो गए हैं। इन दुकानदारों को न तो किराये पर दुकानें मिल रही हैं और न ही कोई अन्य सहारा दिख रहा है।
धर्मपुर बाजार में शनिवार को लगभग आठ दुकानों को तोड़ा गया। दूसरी ओर फोरलेन कंपनी की ओर से पेड़ काटने की वजह से हाइवे पर दिन भर जाम लगा रहा। पेड़ काटने के कारण सनवारा से डगशाई दौसड़का तक जाम लगा रहा। सरकारी और निजी बसें जाम में फंसी रहीं। इस कारण लोग अपने स्थान तक पहुंचने में लेट हो गए।
पुलिस स्टेशन धर्मपुर के प्रभारी अनिल ठाकुर ने जाम खुलवाने के लिए खुद मोर्चा संभाला। लेकिन बाहरी राज्यों के पर्यटकों द्वारा बार-बार सड़कों पर डबल लाइन और निजी होटलों में गाड़ियों की अवैध पार्किंग की वजह से दिन भर परेशानी आती रही। शनिवार को धर्मपुर समेत आसपास के गांव में बिजली, पानी और टेलीफोन सेवाएं बहाल नहीं हुई।
कुछ भवन मालिकों को दी राहत: घोसिया
फोरलेन कंपनी के मैनेजर उमेश कुमार घोसिया ने बताया कि कुछ भवनों को मुआवजा न मिलने से कुछ समय के लिए छोड़ दिया है। मुआवजा मिलने के तुरंत बाद उन्हें भी तोड़ दिया जाएगा। भवनों से निकला मलबा इकट्ठा किया जा रहा है, बहुत जल्द जगह खाली करवाकर सड़क बनाने की कवायद शुरू हो जाएगी।