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उसे पता भी न चला, कब नशा उसे लील गया कविता से नशे से दूर रहने का दिया संदेश

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..उसे पता भी न चला, कब नशा उसे लील गया
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कविता के जरिये दिया नशे से दूर रहने का संदेश
भाषा एवं संस्कृति विभाग ने नशे के दुष्प्रभावों पर करवाई गोष्ठी
अमर उजाला ब्यूरो
सोलन। भाषा एवं संस्कृति विभाग सोलन की ओर से नशे की दुष्प्रवृत्ति के कारण और प्रभाव विषय पर मासिक गोष्ठी आयोजित की गई। कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. प्रेमलाल गौतम ने की। गोष्ठी में साहित्यकारों ने कविता के माध्यम से नशे की दुष्प्रवृत्ति विषय पर अपने विचार साझा किए और युवा पीढ़ी को नशे से दूर रहने का संदेश दिया। सर्वप्रथम सुनीता शर्मा ने उसे पता भी न चला, कब नशा उसे लील गया, नशे की शिदद्त से खींचता चला गया कविता सुनाकर सभी को संदेश दिया कि नशे की लत बहुत बुरी है। युवा कवि सौरभ सेवल ने मैं आज के युग का लड़का हूं, मैं नहीं जानता प्यार-व्यार, मैं बात-बात पे भड़का हूं मैं आज के युग का लड़का हॅूं’ कविता प्रस्तुत की। पद्मदेव शास्त्री ने नशा तुम भूलकर कभी न करना, नशा करके अपना जीवन नरक मत करना के द्वारा नशे से दूर रहने का संदेश दिया। सोलन के प्रणव थिएटर बियोंड थिएटर के निदेशक संजीव अरोड़ा ने सवाल जिंदगी का खुद से पूछ लें, सबसे पहले अपने को सुधार लें कविता प्रस्तुत की। केआर कश्यप ने नशे का सबसे बड़ा कारण बच्चों को खुद से दूर छात्रवासों में भेजना और अंग्रेजी माध्यम का बढ़ता प्रचलन बताया। उन्होंने अपनी कविता इंसान की फितरत है कुछ नया कर गुजरना, जिंदादिली से जीना, जिंदादिली से मरना प्रस्तुत की। इसके अलावा सुरेश शास्त्री, रत्न ठाकुर, हेमंत अत्री, ममता ठाकुर ने कविता के माध्यम से नशे की बढ़ती जा रही प्रवृति तथा नैतिकता के निरंतर होते जा रहे पतन पर ंचिंता जताई। इस मौके पर जिला भाषा अधिकारी कुसुम संघाइक सहित अन्य लोग मौजूद रहे।
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