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सोलन में हिंदी दिवस पर गूंजा पुराना उपायुुक्त कार्यालय, कवियों ने प्रस्तुत कीं कविताएं

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अमर उजाला ब्यूरो

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सोलन (सोलन)। मुझे मेरा सम्मान चाहिए, राजभाषा ही नहीं राष्ट्रभाषा के रूप में स्थान चाहिए, मैं हिंदी हूं मुझे मेरा हिंदुस्तान चाहिए। वीरवार को कुछ ऐसी कविताओं से सोलन शहर का पुराना उपायुक्त कार्यालय गूंज उठा। मौका था हिंदी दिवस पर आयोजित कार्यक्रम का। इस मौके पर उत्तम चंद समेत अन्य कवियों ने हिंदी भाषा के महत्व पर अपनी रचनाओं से प्रकाश डाला। डॉ. राजन तनवर ने कहा हिंदी हमारी मां है, अंग्रेजी हमारी मेहमान तो वरिष्ठ साहित्यकार सचपाल ने मीठी भाषा असा रही हिंदी, जुग-जुग जियो हिंदी रचना प्रस्तुत की।

किशोरी लाल कौंडल ने मेहनत मजदूरी करके भी हम भूखे पेट ही सोते हैं, किस उम्मीद से वोट दिए थे, किसान अब रोते हैं, प्रस्तुत कर किसानों की व्यथा को बयां किया। वरिष्ठ साहित्यकार डा. अशोक गौतम ने कहा कि पांव में पड़े जूतों का कमाल देखिए, साहब से पूछते हैं सवाल देखिये, रचना प्रस्तुत की। वरिष्ठ कवयित्री उषा आनंद ने जिंदगी दो चार पल की मुस्कराते जाइये, बदल रहा है रुख हवा का बस देखते जाइये प्रस्तुत की। इसके बाद युवा कवि हेमंत अत्रि ने बिंदी हिंदी का श्रृंगार है, बिन बिंदी कुंति भी लाचार है रचना प्रस्तुत कर हिंदी के संरक्षण में सभी को सहयोग देने के लिए प्रेरित किया। युवा कवि नरेंद्र शर्मा ने कहा कि अब तो आदत हो गई, दिन-रात अपनी नाकामियों को नकारते, हमें तो खुद को कोसने की आदत हो गई।
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वरिष्ठ कवयित्री कुमारी सुनीता शर्मा ने कहा कि एक नेता के लिए जो भीड़ टॉनिक बन जाती है, दूसरे नेता के लिए वहीं भीड़ आक्रामक बन जाती है, प्रस्तुत की। इसके अलावा गोष्ठी में लक्ष्मीदत्त शर्मा, अशोक शर्मा, अमर सिंह बरवाल, बेलीराम आजाद, मदन हिमाचली, ममता ठाकुर ने कविता पाठ किया। गोष्ठी में राष्ट्रपति अवार्ड से सम्मानित एवं जाने-माने संस्कृत विद्वान प्रो. केशव शर्मा ने मुख्यातिथि के रूप में शिरकत की। उर्दू के प्रख्यात विद्वान डॉ. जोगराज ने गोष्ठी की अध्यक्षता की। जिला भाषा अधिकारी सोलन कुसुम संघाईक ने गोष्ठी में आए सभी साहित्यकारों एवं कवियों का स्वागत किया।

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