हर माह चार लाख फूंक शहर का कचरा शिमला भेज रही सोलन नप
स्मार्ट सिटी का ख्वाब देख रही नगर परिषद सोलन के पास नहीं कचरा निस्तारण के लिए संयंत्र
सोलन शहर रोज उगलता है 18 टन कूड़ा, सलोगड़ा साइट को एनजीटी ने किया था बंद
अमर उजाला ब्यूरो
सोलन। स्मार्ट सिटी का ख्वाब देख रहे सोलन के पास न तो अपना कोई कूड़ा संयंत्र है और न ही कई वार्डों में आज तक सीवरेज लाइन ही बिछाई जा सकी है। नगर परिषद के पास सलोगड़ा में कूड़ा फेंकने की इकलौती जगह थी जिसे एनजीटी ने बंद कर दिया। सलोगड़ा में नगर परिषद सिर्फ कूड़ा फेंक रही थी जबकि उसे नष्ट कर खाद बनाने की प्रक्रिया अमल में नहीं लाई जा रही थी। इसे देखते हुए एनजीटी ने इस स्थल को विकराल कूड़े का पहाड़ बनने से पहले बंद करवा दिया। नगर परिषद अब कूड़ा फेंकने के लिए शिमला पर निर्भर है। इसके लिए नगर परिषद को हर माह करीब चार लाख रुपये खर्च करने पड़े रहे हैं। नगर परिषद अपने अधीन क्षेत्र में कूड़ा संयंत्र के लिए साइट देखने में नाकाम रही है। रोज 18 टन कूड़ा शिमला ले जाना पड़ रहा है। शहर में कूड़ा संयंत्र न होना नगर परिषद के लिए गले की फांस बन गया है। शहर के साथ ही कूड़ा फेंकने के लिए बनाए कूड़े संयंत्र पर रोक लगने के बाद कमेटी को कूड़े के वाहनों को शिमला दौड़ाना पड़ रहा है। दो वर्ष पहले एनजीटी ने सलोगड़ा कूड़ा संयंत्र को बंद कर दिया था। इस कारण नगर परिषद को पहले कूड़ा चंडीगढ़ और अब शिमला दौड़ लगानी पड़ रही है।
सोलन में नहीं है कोई जगह : देवेंद्र
नगर परिषद अध्यक्ष देवेंद्र ठाकुर ने कहा कि सोलन शहर में कूड़ा ठिकाने लगाने के लिए कोई जगह नहीं है। इसलिए नप रोज कूड़ा शिमला भेज रही है। उन्होंने कहा कि इस पर हर माह चार लाख रुपये खर्च हो रहे हैं। नगर परिषद शहर के आसपास कूड़ा संयंत्र के लिए जगह तलाश कर जल्द निर्माण करवाएगी।