सोलन। किसान और मजदूर की बेटियों ने हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड के जमा दो कक्षा के परीक्षा परिणाम में ऊंची उड़ान भरी है। शिक्षा की उन्नत तकनीकें और अतिरिक्त पाठ्यक्रम न होने के बावजूद लड़कियां वरियता सूची में अव्वल रही हैं। सोलन जिले के हिस्से कुल सात स्थान मेरिट में आए हैं। इनमें से चार लड़कियां हैं। सबसे शानदार प्रदर्शन अर्की उपमंडल में रहा है। यहां से तीन छात्राएं और एक छात्र ने मेरिट सूची में जगह बनाई है। इसके अलावा सोलन, कंडाघाट और नालागढ़ उपमंडल से भी एक-एक छात्र इस सूची में जगह पाने में कामयाब हुआ है।
अर्की की तीनों छात्राएं आम परिवारों से ताल्लुक रखती हैं। लेकिन इन सभी ने भविष्य बदलने के लिए पढ़ाई को अपनी ढाल बनाया है। आर्ट्स में पहले दस छात्रों में जगह बनाने वाली अंकिता और भावना एक ही स्कूल में पढ़ाई कर रही हैं। कॉमर्स संकाय में ममलीग से दीपक ने पांचवां और घनागुघाट से शालू ने दसवां स्थान हासिल किया है। अंकिता के पिता शिमला में किसी दुकान पर कार्य करते हैं और माता गृहणी हैं। इस मुकाम तक पहुंचने के लिए अंकिता ने कड़ी मेहनत की है। उसके जिला में अर्की की बेटियों की उपलब्धि की चर्चा पूरे जिले में हो रही है। इतना ही नहीं अंकिता की सहपाठी भावना निवासी थला पुत्री मोहनलाल शर्मा के पिता किसान हैं। ऐसी ही कहानी कॉमर्स संकाय में दसवां स्थान हासिल करने वाली शालू पुत्री राजेंद्र निवासी खांगड़ की भी है। शालू के पिता भी किसान हैं। किसान की बेटी ने भविष्य बदलने के लिए पढ़ाई को अपनी ढाल बनाया है और अब वो बैंक अधिकारी बनकर पिता के लिए बेटे का किरदार निभाना चाहती हैं।
ओच्छघाट की गीतांजलि और कंडाघाट के अंशुल भी सरकारी स्कूल में ही पढ़ाई कर रहे हैं। परीक्षा परिणामों ने निजी स्कूलों को भी बुरी तरह से पछाड़ दिया है। सोलन के हिस्से आए सभी आठ स्थानों में से सिर्फ विज्ञान संकाय हर्ष चंदेल को छोड़ दिया जाए तो अन्य किसी भी स्थान पर निजी स्कूलों का नाम नहीं है। बहरहाल, किसान और मजदूर की बेटियों ने साधन, संपन्न निजी स्कूलों को भी करारा जवाब दिया है। भारी-भरकम फीस और बड़े तामझाम के बावजूद निजी स्कूल वरियता सूची में सिर्फ एक स्थान पर है। सोलन में पूरी तरह से सरकारी स्कूलों और छात्राओं ने दबदबा साबित है।