परवाणू (सोलन)।
हिमाचल अर्बन डेवलपमेंट अथॉरिटी (हिमुडा) में कार्यरत कर्मियों को पेंशन का हक नहीं मिल पा रहा है। पेंशन न मिलने से जहां हिमुडा से रिटायर हुए कर्मियों को गुजर बसर करना मुश्किल हो गया है। वहीं अभी कार्यरत कर्मियों को भविष्य की चिंता सताने लगी है।
हिमुडा से सेवानिवृत्त हुए 477 में से 160 कर्मियों को तो पेंशन मिल रही है लेकिन बाकी बचे 317 कर्मियों को पेंशन की सुविधा नहीं मिल पा रही है। भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) के साथ विवाद की वजह से 2013 के बाद सेवानिवृत्त हुए कर्मियों को पेंशन नहीं मिल पा रही है। राज्य सरकार के पेंशन न देने के फैसले के बाद हिमुडा कर्मियों को राहत देने के लिए हिमुडा ने वर्ष 2007 में अपने स्तर पर पेंशन पॉलिसी बनाई थी। हिमुडा ने एलआईसी के साथ एमओयू भी साइन किया गया। हिमुडा ने उस दौरान प्रीमियम समेत 54 करोड़ की रकम एलआईसी को दी थी। जिसके बाद एलआईसी ने हिमुडा से सेवानिवृत्त कर्मियों को महंगाई भत्ते समेत पेंशन दी जानी थी। मार्च 2013 तक तो सब कुछ ठीक रहा लेकिन अप्रैल 2013 के बाद रिटायर कर्मियों को पेंशन मिलना बंद हो गई। तब से लेकर अब तक कर्मी पेंशन की आस लगाए बैठे हैं।
प्रदेश सरकार करे हस्तक्षेप : कर्मचारी
इस बारे में हिमुडा इंप्लायज एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष राजेश ठाकुर का कहना है की हिमुडा प्रबंधन की पालिसी की सभी शर्तों के मुताबिक़ तय रकम एलआईसी को जमा करवाई जा रही है लेकिन एलआईसी की ओर से पेंशन स्कीम का क्रियान्वन सही रूप से नहीं किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इसमें हिमुडा प्रबंधन की कोई गलती नहीं है। लेकिन हिमुडा इंप्लायज एसोसिएशन प्रबंधकों और राज्य सरकार से आग्रह करती है की इस स्कीम के क्रियान्वन के लिए उचित कदम उठाए जाएं ।
जल्द हल होगी समस्या : उमेश शर्मा
हिमुडा के चीफ इंजीनियर उमेश शर्मा का कहना है कि प्रबंधन को कर्मियों के हितों का पूरा ध्यान है। पेंशन व्यवस्था शुरू करवाने के लिए उचित कदम उठाए जा रहे हैं। जल्द ही इस समस्या का समाधान निकल आएगा। उन्होंने कहा कि समस्या हल होने के बाद कर्मचारियों को तय शर्तों पर पेंशन की अदायगी होगी।