परवाणू (सोलन)। राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक स्कूल परवाणू में नौंवीं कक्षा में फेल हुए छात्रों को दोबारा दाखिल नहीं दिया गया। अभिभावकों का आरोप है कि स्कूल प्रबंधन दाखिला देने से इंकार कर रहा है। इस कारण परिजनों को अपने बच्चों के भविष्य की चिंता सताने लगी है। परिजनों ने नगर परिषद परवाणू के पार्षद संजय यादव से शिकायत कर मदद की गुहार लगाई है। परिजन रंजू ने आरोप लगाया है कि उसकी बेटी प्रीति और उसके पड़ोसी का बेटा अजीत नौंवीं कक्षा में फेल हुए थे। इसके बाद एक दिन पहले स्कूल में दोबारा से दाखिला लेने के लिए गए लेकिन वहां पर मौजूद एक अध्यापिका ने फेल होने वाले बच्चों को दाखिला न देने का हवाला देर उन्हें वापस घर भेज दिया। इसके बाद वह सभी स्कूल से वापस आ गए और इस बारे में पार्षद से शिकायत की। यहां पर रंजू ने आरोप लगाया कि स्कूल की अध्यापिका ने कहा कि आप अपने बच्चे को लेकर चले जाओ और ओपन बोर्ड से 10वीं की परीक्षा करवा दो। दूसरी ओर स्कूल प्रबंधक ने परिजन के आरोपों को पूरी तरह से नकारा है और कहा है कि फेल होने वालों को दाखिला दिया जाएगा। लेकिन जो बच्चे खुद पढ़ना नहीं चाहते हैं उनके दाखिला में ही परेशानी आ रही है। स्कूल प्रबंधन के मुताबिक बच्चे खुद ओपन बोर्ड से परीक्षा की बात कर रहे थे जबकि उनके अभिभावक उन्हें दोबारा से नौंवीं में पढ़ाना चाहते हैं।
तीन-चार मिली हैं शिकायतें : पार्षद
वार्ड पार्षद संजय यादव ने कहा कि उनके पास तीन चार शिकायतें आ चुकी हैं। इसमें स्कूल प्रबंधन ने बच्चों को दाखिला देने से इंकार किया है। बताया कि इन शिकायतों को गंभीरता से लिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि शिक्षा का अधिकार सभी बच्चों को है। यदि छात्र किसी कारणवश फेल हुआ है तो स्कूल प्रबंधन को उसे बुलाकर जागरूक करना चाहिए।
छात्र खुद ओपन बोर्ड से देना चाहते हैं परीक्षा
स्कूल की प्रधानाचार्य प्रतिमा शर्मा ने बताया कि छात्रों को दाखिला न देने के संबंध में कोई बात नहीं हुई है। कुछ बच्चे खुद ओपन बोर्ड से दसवीं की परीक्षा देना चाहते हैं। लेकिन उनके अभिभावक उन्हें नौंवीं में ही पढ़ाने पर दबाव बना रहे हैं। ऐसे छात्रों का दाखिला नहीं हो पाया है जिसे लेकर चर्चा चल रही है।