राजीव थाली योजना बनी गले की फांस
पच्चीस रुपये में पूरा नहीं हो रहा खर्च
कैंटीन संचालक बोले-गुजारा करना हुआ मुश्किल
अमर उजाला ब्यूरो
सोलन। कांग्रेस कार्यकाल में करीब डेढ़ साल पूर्व मुसाफिरों को सस्ता खाना मुहैया करवाने की योजना संचालकों के लिए गले की फांस बन गई है। राजीव थाली के नाम की इस योजना में महज 25 रुपये में दो रोटी, चावल, दाल और सब्जी परोसने के निर्देश उस समय परिवहन मंत्री जीएस बाली ने जारी किए थे। इसके बाद यह योजना पूरे प्रदेश के चुनिंदा बस अड्डों पर शुरू कर दी गई। बस अड्डों पर इस योजना के लिए टेंडर प्रक्रिया अपनाई गई। कुछ जगहों पर एक साल तो सोलन बस अड्डे में पांच साल के लिए टेंडर जारी कर दिया गया। आलम यह है कि अब राजीव थाली की जगह कई कैंटीन संचालक छोले-भटूरे और चाय-कॉफी बेच कर गुजारा चला रहे हैं। धीरे-धीरे थाली गायब हो रही है और इसकी जगह कैंटीन को फास्टफूड कार्नर में ढाला जाने लगा है। परिवहन निगम ने जिस समय टेंडर जारी किया था, उस दौरान कैंटीन के साथ ही कुछ सामान भी मुहैया करवाने की बात कही गई थी। कैंटीन संचालकों को जगह परिवहन निगम की ओर से दी जानी थी। इसके लिए बस स्टैंड में कैंटीन के नाम पर खाली जगह दी गई और इसका न्यूनतम किराया तय किया गया लेकिन इसके अलावा कोई भी सुविधा कैंटीन संचालक को नहीं दी गई। कैंटीन संचालक बाजारी मूल्य के आधार पर दाल, चावल और सब्जी की खरीद कर रहे हैं। राजीव थाली बेचकर गुजारा न होने की वजह से अब कई ढाबा संचालकों ने परिवहन निगम से मिली इस कैंटीन में दूसरे उत्पाद भी बेचने शुरू कर दिए हैं।
थाली बेचने से नहीं चल रहा घर : नासिर
सोलन में राजीव थाली की कैंटीन चला रहे नासिर का कहना है कि डेढ़ साल पूर्व उन्हें कैंटीन का टेंडर मिला था। उस समय 25 रुपये थाली का दाम तय किया गया लेकिन आज के हिसाब से यह दाम काफी कम है। बाजार में दाल, सब्जी और चावल के भाव बढ़ गए हैं। इससे थाली बेचकर गुजारा नहीं चल पा रहा है। उन्होंने बताया कि पूर्व सरकार के कार्यकाल में वह मंत्री जीएस बाली से मिले थे और कैंटीन में हल्का भोजन रखने की मांग की थी। इसे उन्होंने स्वीकार कर लिया और उसके बाद राजीव थाली के साथ ही छोले-भटूरे, चाय, कॉफी और परांठा भी गुजारा चलाने के लिए बेचना पड़ रहा है।
अभी नहीं आए नए निर्देश : आरएम सोलन
परिवहन निगम सोलन के क्षेत्रीय प्रबंधक सुरेश धीमान का कहना है कि राजीव थाली को लेकर अभी नए निर्देश नहीं आए हैं। इसलिए पूर्व निर्धारित योजना के अनुरूप ही थाली परोसी जा रही है। इसके बारे में भविष्य में जो भी निर्णय लिया जाएगा, परिवहन निगम उस पर अमल करेगी। फिलहाल, 25 रुपये में सभी यात्रियों को खाना देने के निर्देश दिए गए हैं। इसमें दो रोटी, दाल, सब्जी और चावल होने जरूरी हैं।