पांवटा में तिब्बत की आजादी संघर्ष को कुर्बानी देने वालों को नमन
शनिवार को काला दिवस की वर्षगांठ पांवटा में मनाई
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अमर उजाला ब्यूरो
पांवटा साहिब(सिरमौर)। जिला सिरमौर तिब्बती समुदाय महिलाओं ने काला दिवस मनाया। 12 मार्च 1959 को चीन के साम्राज्यवादी सेना ने आक्रमण कर लहासा में बम वर्षा की थी। तिब्बत की वीर महिलाएं बड़ी बहादुरी से अधिग्रहण के खिलाफ लड़ीं। काला दिवस पर पांवटा में शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया। शनिवार को पांवटा में काला दिवस की वर्षगांठ मनाई गई। पांवटा के भूपपुर से शांति मार्च निकाला गया। एनएच-72 पर भूपपुर से बद्रीपुर, वाई प्वाइंट से मुख्य बाजार होकर मिनी सचिवालय पांवटा तक शांति मार्च पहुंचा। विश्व समुदाय से तिब्बत की आजादी में सहयोग का आग्रह किया।
हिंद-तिब्बत मैत्री संघ प्रधान डॉ. एमएल खुराना, के सीरिंग, तिब्बती सेटलमेंट ऑफिसर भूपपुर पेमा त्सोमों व पुरुवाल सेटलमेंट ऑफिसर टोगी ने कहा कि तिब्बत पर चीन का दमनकारी शासन चल रहा है।12 मार्च 1959 में लहासा हमले के दौरान महिलाओं पर चीनी सैनिकों ने अत्याचार किए। देश की आजादी को सन 2009 से अब तक 151 तिब्बतियों ने आत्मदाह किया जो देश कि आजादी में 14वें दलाई लामा की तिब्बत में वापसी की मांग कर रहे हैं। 11वें पंचेन लामा गेडुन च्यूकि नईमा को चीनी सेना ने अभी तक बंदी बना कर रखा हुआ है। 21 वर्ष पहले उनका व परिवार का अपहरण कर लिया गया था। आज दिन तक उनका कोई पता नहीं है।
तिब्बती महिला संगठन अंतरराष्ट्रीय सरकारों व मानवाधिकार संगठनों ने पूरजोर अपील करती है कि चीन सरकार पर दबाव डाला जाए। महिला संगठन चीन की जो बौद्ध जनसंख्या को भ्रमित करने वाली नीतियां हैं उनका विरोध करती है। चीन के राष्ट्रपति जिग सिंग से अनुरोध करते हैं कि तिब्बत की चिरकालीन राष्ट्रीय समस्याओं के स्थायी हल के लिए धर्मगुरु दलाई लामा को आमंत्रित करें जिससे आपसी बातचीत से कोई रास्ता निकल सके। चीन सैनिकों के अत्याचार बंद हो। देश आजादी को शहीदों की आत्मिक शांति को 2 मिनट का मौन रख गया। इस मौके पर समूह तिब्बती महिला संगठन, तिब्बतीयन स्कूल भूपपुर स्टाफ व तिब्बती समुदाय के लोग मौजूद थे।
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सुरेश तोमर
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