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Sirmour News: चिकित्सकों समेत पैरामेडिकल स्टाफ के बिना चरमराईं स्वास्थ्य सेवाएं

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सिविल अस्पताल पांवटा में चिकित्सकों के कक्ष के बाहर लगीं मरीजों की कतारें। संवाद
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फोटो-5, 6
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पांवटा अस्पताल में दो दर्जन स्टाफ नर्सों समेत 75 पद रिक्त
चिकित्सकों समेत पैरामेडिकल स्टाफ के बिना चरमराईं स्वास्थ्य सेवाएं , मरीज परेशान
रेडियोलॉजिस्ट, फिजिशियन और एनेस्थीसिया विशेषज्ञ जैसे पद भी चल रहे खाली
संवाद न्यूज एजेंसी
पांंवटा साहिब (सिरमौर)। 800 से 1,000 प्रतिदिन की ओपीडी वाले सिविल अस्पताल पांवटा साहिब में विभिन्न श्रेणी के पदों के रिक्त होने से स्वास्थ्य सेवाएं बुरी तरह लड़खड़ा रही हैं। हालत ये है कि यहां दो दर्जन स्टाफ नर्सों, चिकित्सकों समेत चतुर्थ कर्मियों के 75 पद रिक्त पड़े हैं।
अस्पताल में एसएमओ समेत 22 पद तो भरे हुए हैं लेकिन तीन विशेषज्ञ चिकित्सक पदों में रेडियोलॉजिस्ट, फिजिशियन व एनेस्थीसिया विशेषज्ञ तैनात ही नहीं है। इससे मरीजों को सबसे ज्यादा दिक्कतें हो रही हैं। बता दें कि पांवटा साहिब में 150 बिस्तर का अस्पताल होने के बाद कुल पदों की संंख्या 195 हो चुकी है। इसमें करीब छह दर्जन पद खाली हैं।
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सबसे ज्यादा परेशानी फिजिशियन, रेडियोलॉजिस्ट व एनेस्थीसिया के नहीं होने से हो रही है। स्वास्थ्य सेवाओं की अहम कड़ी मानी जाने वाली स्टाफ नर्सों के दो दर्जन से अधिक पद रिक्त हैं। फूड इंस्पेक्टर डाटा ऑपरेटर, तीन-तीन पद रेडियोग्राफर और वार्ड ब्वाय, चतुर्थ श्रेणी के 22 पद समेत 75 से अधिक पद रिक्त पड़े हैं। प्रदेश में सरकार बदलने के बाद जनता को सुविधाओं में इजाफा होने की उम्मीद थी लेकिन अब तक रिक्त पदों को नहीं भरा जा सका है।
स्टाफ नर्सों की कमी के चलते डबल ड्यूटी करनी पड़ रही है। साप्ताहिक अवकाश नहीं मिल रहा और माह में दो-दो बार नाइट ड्यूटी आ रही हैं। ऐसे में कर्मचारियों पर भी अति कार्यभार पड़ रहा है। एनेस्थीसिया नहीं होने से ऑपरेशन नहीं हो पाते। रेडियोलॉजिस्ट पर रिक्त होने पर गर्भवती महिलाओं को बाहर निजी क्लीनिकों में अल्ट्रासाउंड करवाना पड़ता है।
सिविल अस्पताल प्रभारी पांवटा साहिब डॉ. अमिताभ जैन ने बताया कि विभागीय अधिकारियों के माध्यम से सरकार और विभाग को रिक्त पदों के बारे में अवगत करवाया गया है।
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छोटे बच्चों की ओपीडी 120 तक पहुंची
इन दिनों मौसम में बदलाव के चलते छोटे बच्चे ज्यादा बीमार हो रहे हैं। सिविल अस्पताल में बच्चों की ओपीडी 120 तक पहुंच रही है। शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. अमिताभ जैन ने कहा कि बदलते मौसम में बच्चों की विशेष देखभाल की जरूरत रहती है। ओपीडी में आने वाले छोटे बच्चों को अधिकतर बुखार, खांसी जुखाम, गला खराब होने के साथ उल्टी-दस्त की शिकायत है।
......तोमर/हितेश

सिविल अस्पताल पांवटा में चिकित्सकों के कक्ष के बाहर लगीं मरीजों की कतारें। संवाद

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