ददाहू (सिरमौर)। अंतरराष्ट्रीय रेणुका मेले के उपलक्ष्य पर हरि प्रबोधिनी एकादशी के दिन शुक्रवार को सैकड़ों श्रद्धालुओं ने रेणुका झील में आस्था की डुबकी लगाई। स्नान का यह सिलसिला ब्रह्म मुहूर्त से लेकर देर शाम तक चलता रहा। स्नान महात्मय को लेकर जिला प्रशासन ने श्रद्धालुओं की सुख सुविधा और सुरक्षा के पुख्ता प्रबंध कर रखे थे। किसी भी अनहोनी से निपटने के लिए छह गोताखोरों को भी तैनात किया था।
सबसे पहले रेणुकाजी तीर्थ स्थित संत-महात्माओं ने ब्रह्म मुहूर्त में शाही स्नान करके स्नान महात्मय का शुभारंभ किया। इसके बाद सभी श्रद्धालुओं ने बारी-बारी से ऐतिहासिक रेणुका झील में आस्था की डुबकी लगाई। कार्तिक शुक्ल पक्ष की एकादशी के दिन रेणुका झील में स्नान करने की सदियों पुरानी परंपरा है।
बता दें कि भगवान परशुराम और मां रेणुकाजी से लोगों की अगाध आस्था जुड़ी होने के कारण इस स्नान महात्मय में प्रदेश सहित उत्तराखंड, हरियाणा, पंजाब व उत्तर प्रदेश आदि से भी भारी मात्रा में श्रद्धालु पहुंचते हैं। जिला के गिरिपार, धारटीधार व सैनधार आदि क्षेत्रों में एकादशी को ग्यास नाम से भी जाना जाता है। इस दिन लोग खिचड़ी का भोग लगाते हैं और खिचड़ी खाते हैं।
स्नान महात्मय में पूरे उतरी भारत से आए श्रद्धालुओं ने शिरकत की, जिसमें महिलाओं की संख्या अधिक रही। स्नान के बाद श्रद्धालुओं ने रेणुका झील की परिक्रमा की और भगवान परशुराम और मां रेणुका मंदिर में पूजा-अर्चना कर देवताओं के दर्शन किए और उनसे आशीर्वाद मांगा। इस दौरान रेणुका तीर्थ में स्थित निर्वाण आश्रम, संन्यास आश्रम व ब्रह्मचारी आश्रम में विशाल भंडारों का आयोजन किया गया जिसमें श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण करके पुण्य कमाया।
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स्वामी दयानंद भारती ने निकाली शाही जलेब
हरि प्रबोधिनी एकादशी पर महामंडलेश्वर स्वामी दयानंद भारती ने शाही जलेब निकाली। उन्होंने पूरी शाही अंदाज में श्री रेणुकाजी की परिक्रमा कर उनका आशीर्वाद मांगा। ढोल नगाड़ों और बैंडबाजे के साथ निकाली शाही जलेब के कारण रेणुका तीर्थ का भक्तिमय हो गया। इस अवसर पर स्वामी प्रकाशानंद भारती सहित कई संत-महात्मा व श्रद्धालु मौजूद रहे।
ेणुकाजी तीर्थ में हरि प्रबोधिनी एकादशी पर रेणुका झील में स्नान करते लोग। संवाद- फोटो : NAHAN