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आग से दहके जंगल, फायर वाचर है नहीं

Fri, 06 May 2016 11:22 PM IST
ब्यूरो अमर उजाला धौलाकुआं (सिरमौर)।
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जंगलों में लगी आग को देखते हुए आपातकाल घोषित कर दिया गया - फोटो : Reuters
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धौलाकुआं (सिरमौर)। पांवटा वन मंडल में आगजनी की ज्यादा घटनाओं पर समय रहते काबू नहीं पाया जा सका। इसका मुख्य कारण इस साल फायर वाचरों की नियुक्ति नहीं होना भी माना जा रहा है। वर्तमान में 2000 से ज्यादा वन हेक्टेयर का जिम्मा मात्र दो चौकीदारों और चार वन रक्षकों के हवाले हैं। ऐेसे में यह कैसे जंगल की रखवाली कर पाएंगे। इसका अंदाजा स्वत: ही लगाया जा सकता है। बजट नहीं मिलने के कारण वन मंडल में करोड़ों रुपये की वन संपदा आग की भेंट चढ़ रही है।
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पिछले साल पांवटा वन मंडल में वन क्षेत्रों को आग से सुरक्षित रखने के लिए विभाग ने एक दर्जन से अधिक फायर वाचरों की तैनाती की थी। एक साल बीत गया है, लेकिन अभी तक उन्हें कोई मेहनताना नहीं मिला जिसके कारण विभाग ने इस साल फायर वाचर रखने की हिम्मत नहीं जुटाई। विभाग के अधिकारी व वन कर्मियों का वेतन तो ऑन लाइन हर महीने आ रहा है लेकिन फायर वाचर एक साल पहले किए गए कार्य का मेहनताना मिलने के इंतजार में है। गर्मियों के दौरान प्रचंड धूप में की गई मेहनत का पैसा नहीं मिलने से फायर वाचर अपने आप को ठगा सा महसूस कर रहे हैं।


गौरतलब है कि स्थानीय गांव से ही विभाग हर साल फायर वाचरों की तैनाती करता है। उन्हें जंगलों की रखवाली करनी होती है। इस साल इनकी नियुक्ति ही नहीं हो पाई। जबकि स्टाफ का भी विभाग के पास भारी टोटा चल रहा है। वर्तमान में पांवटा रैंज के एक ब्लॉक में मात्र दो चौकीदार है। उनके हिस्से करीब दो हजार हेक्टेयर वन क्षेत्र का जिम्मा है। यहां चार फायर वाचर नियुक्त किए जाते थे। इसी प्रकार अन्य वन रेंजों में भंगाणी गिरि नगर और माजरा में प्रति बीट एक फायर वाचर रखने की जरूरत थी। बिना बकाया राशि के फायर वाचर नहीं रखे गए जिसका खामियाजा इस साल बड़े पैमाने पर भुगतना पड़ा है।
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उधर, इस संदर्भ में वन मंडलाधिकारी एसएस राणा ने बताया कि बीते साल की बकाया राशि लगभग 70 हजार रुपये से ज्यादा है। फायर वाचरों को इस राशि का भुगतान करने के लिए आला अधिकारियों को पत्राचार किया गया है। उन्होंने कहा कि फायर वाचरों को रखने के लिए सभी आरओ को कहा गया है जहां पर जरूरत होगी वहीं पर रखे जा रहे हैं।
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