शिलाई (सिरमौर)। हिमाचल और उत्तराखंड की सीमा पर स्थित तमसा नदी में किशाऊ बहुउद्देशीय बांध परियोजना की सुगबुगाहट शुरू हो गई है। वहीं इलाके के लोगों में विस्थापित होने का डर सताने लगा है। हालांकि इस मामले में हिमाचल और उत्तराखंड दोनों ही सरकारों के नेता और अधिकारी कुछ कहने को तैयार नहीं है लेकिन, शिलाई उपमंडल के विस्थापित होने वाले ग्रामीणों ने परियोजना का विरोध शुरू कर दिया है।
शिलाई उपमंडल के मोहराड़ के निकट तमसा (टौंस) नदी पर किशाऊ बांध परियोजना का निर्माण किया जाना प्रस्तावित है। 21 जुलाई 2015 को हिमाचल और उत्तराखंड के बीच एमओयू साइन हुआ है। वहीं, ज्वाइंट वैंचर कमेटी का भी गठन किया गया है। अब किशाऊ बांध के विस्थापित निर्माण कार्य आरंभ होने और मुआवजा मिलने के इंतजार में है। आंशिक रूप से प्रभावित होने वाले ग्रामीण जहां परियोजना शीघ्र बनाने की बात कर रहे हैं। वहीं, पूर्ण रूप से स्थापित होने वाले गांव के लोग इसका विरोध कर रहे हैं। 660 मेगावाट की इस परियोजना में हिमाचल और उत्तराखंड के लोगों की लगभग तीन हजार हेक्टेयर भूमि जलमग्न हो जाएगी जिसमें हिमाचल के नौ राजस्व गांव के 18 गांव विस्थापित होंगे। उत्तराखंड के आठ राजस्व गांव के 20 उपगांव भी बांध के पानी के दायरे में आएंगे।
किशाऊ बांध संघर्ष समिति के अध्यक्ष मातवर सिंह तोमर ने बताया कि संघर्ष समिति बांध बनाने के पक्ष में नहीं है। वह इसका विरोध करती है। इसके बनने से लोगों के हक हकूक छिन जाएंगे। इससे बेहतर यह है कि इस नदी पर छोटी-छेटी तीन इकाइयां स्थापित की जाएं।
उधर, स्थानीय विधायक बलदेव तोमर ने कहा कि वह क्षेत्र के लोगों के साथ हैं। किसी भी तरह का अन्याय नहीं होने देंगे। विस्थापितों को किसी भी तरह की समस्या नहीं आने दी जाएगी। जबकि पूर्व विधायक हर्ष वर्धन चौहान का कहना है कि जनता के अधिकारों के लिए लड़ाई लड़ी जाएगी। वह जनता के साथ हैं।