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एंबुलेंस मिलती, तो बच जाती इनायत की जान

Thu, 03 Nov 2016 10:40 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, पांवटा साहिब (सिरमौर)
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एंबुलेंस का हूटर - फोटो : अमर उजाला
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पांवटा साहिब (सिरमौर)। वीरवार को समय रहते 108 एंबुलेंस सुविधा मिल जाती तो शायद 9 माह की मासूम इनायत की जान बच जाती। गंभीर हालत में बच्ची को सिविल अस्पताल पांवटा पहुंचाया गया। इमरजेंसी ट्रीटमेंट देने के बाद हालत गंभीर होने पर मरीज को नाहन रेफर कर दिया गया। परिजनों ने आपातकालीन 108 एंबुलेंस सेवा को कॉल कर सूचना दी लेकिन, नवादा गांव का निर्धन परिवार करीब 40 मिनट तक एंबुलेंस का इंतजार करता रहा और बच्ची की मौत हो गई।  नवादा निवासी नसीम अहमद(33) ने बताया कि छोटे भाई शकील एवं अंजुम की पुत्री इनायत (9 माह) की तबीयत काफी नासाज हो गई।
 बच्ची को सांस लेने में काफी दिक्कतें आ रही थी। किसी तरह सिविल अस्पताल पांवटा पहुंचाया गया। जहां पर वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. कमाल पाशा ने इमरजेंसी ट्रीटमेंट सेवाएं दीं। हालत गंभीर होने पर बच्ची को तुरंत रेफर कर दिया गया। परिजनों से शीघ्र मरीज को नाहन या देहरादून पहुंचाने को कहा गया। बीमार बच्ची के पिता शकील(30) खुद भी अस्पताल में उपचाराधीन हैं।
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नसीम अहमद ने कहा कि वीरवार दोपहर 12 बजे सिविल अस्पताल में बच्ची को पहुंचाया था तुरंत, प्राथमिक उपचार के बाद बच्ची को रेफर कर दिया गया। इसके बाद आपातकालीन सेवा 108 पर कॉल कर दी गई। पांवटा 108 एंबुलेंस कहीं बाहर गई थी। इसलिए दूसरी एंबुलेंस उपलब्ध करवाने का आग्रह किया गया लेकिन कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला। समय रहते गंभीर रुप से बीमार बच्ची को 108 एंबुलेंस उपलब्ध नहीं हो सकी। इसके चलते दोपहर करीब 12.40 बजे बच्ची ने दम तोड़ दिया। परिजनों का कहना है कि आपातकालीन एंबुलेंस सेवा समय पर मिल जाती तो शायद मासूम इनायत की जिंदगी बच जाती।
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उधर, सिविल अस्पताल पांवटा प्रभारी डॉ. डीडी शर्मा ने कहा कि बच्ची को प्राथमिक उपचार दे दिया गया था। बच्ची की जांच करने वाले स्थानीय डॉक्टर ने हालत गंभीर होने पर बच्ची को रेफर कर दिया लेकिन परिजन बच्ची को अस्पताल नहीं पहुंचा सके।
 
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