नाहन(सिरमौर)। गर्मियां शुरू होते ही जिला सिरमौर में आग (दावानल) मामलों में निरंतर इजाफा होता जा रहा है जिससे अमूल्य वन संपदा को बचाने में विभागीय टीम को काफी मशक्कत करनी पड़ रही है। केवल अप्रैल माह 2016 में ही आगजनी से करीब 200 हेक्टेयर वन भूमि तथा 30 हेक्टेयर निजी घासन भूमि पर आगजनी से हजारों छोटे-पौधों को भारी क्षति पहुंची है। जिले में तीन दर्जन से अधिक आगजनी मामले आ चुके हैं।
पांवटा वन मंडल के राजबन स्थित एक संस्थान के आसपास लगते जंगली क्षेत्र में वन संपदा की भारी तबाही हो रही है। तीन दिनों से आग पर काबू पाने के प्रयास जारी हैं। सैकड़ों हेक्टेयर भूमि पर लगे पेड़ पौधौं को आग से क्षति पहुंच रही है। क्षेत्र के छछेती, मालगी, खारा जंगल में साल, सैन के पेड़ पौधें हैं।
माजरा, जंबूखाला, गिरिनगर, गातू व हरीपुर में भी आगजनी से वन क्षेत्र में क्षति पहुंची है। वन क्षेत्र धू-धू कर पिछले दो तीन दिनों से धधक रहे हैं। स्थानीय क्षेत्र में कार्यरत वन विभाग के बीओ कुंबिया राम ने बताया कि विभाग कर्मी व ग्रामीण निरंतर आग पर काबू पाने को प्रयासरत है। पांवटा वन मंडल के राजपुर कंडेला, भटरोग दाविल, गोजर व बारह क्षेत्र तक करीब 40 हेक्टेयर भूमि पर आग से क्षति पहुंची है। इसमें जंगल व निजी घासन क्षेत्र शामिल है। वहीं, कर्नल शेरजंग नेशनल पार्क के साथ लगते वन क्षेत्रों में भी आगजनी के दो तीन मामले आ चुके हैं।
रेणुकाजी वन क्षेत्र के शिलाई में शिल्ली जंगल में करीब 15 सौ बीघा भूमि पर आग से नुकसान पहुंचा है जिसमें चीड़, बान, बुराश व कैल के पेड़ के हजारों छोटे पौधे नष्ट हो गए। कफोटा रेंज के टटियाणा, जामना व खजूरी में आगजनी से 25 हेक्टेयर भूमि पर छोड़े पौधे जल कर स्वाह हो चुके हैं। सतौन वन बीट के मानल में भी आगजनी से 30 हेक्टेयर भूमि पर क्षति हुई है। वहीं, सराहां क्षेत्र के शिकोह बीट, बागधन, बाग पशोग, डिलमन, नारंग में करीब 400 बीघा भूमि से ज्यादा क्षेत्र में पिछले दिनों आगजनी से क्षति पहुंची। शंबूवाला जंगल क्षेत्र में भी सैकड़ों हेक्टेयर में आगजनी से जंगल के छोटे पेड़ पौधे जल कर स्वाह हो गए। नाहन फायर स्टेशन में आसपास वन क्षेत्र में आगजनी के दर्जनों मामले आ चुके हैं।
उधर, डीएफओ पांवटा एसएस राणा ने कहा कि पहाड़ी जंगल क्षेत्र में ज्यादा दिक्कतें आगजनी पर काबू पाने में आती रही हैं। मैदानी क्षेत्र के साथ लगते वन क्षेत्र में फायर ब्रिगेड की सहायता भी मिल जाती है। 15 अप्रैल से फायर सीजन 15 जून तक चलेगा। इस बीच सभी कर्मचारियों का अवकाश रद्द कर दिया गया है। पांवटा मंडल में 30 हजार हेक्टेयर से वन भूमि है। वन क्षेत्र में 22 फायर वाचर रखे गए हैें, तुरंत सूचना मिलने पर अधिकतर क्षेत्रों में आगजनी पर काबू पा लिया गया है। केवल राजबन स्थित एक संस्थान के आसपास आग ज्यादा बेकाबू हो रही है। इसके आसपास जंगल में आग पर काबू पाने के प्रयास जारी हैं।
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-आगजनी के मामलों से वन प्राणियों पर बनी रहती आफत
-जंगल में पानी स्रोत के समीप शिकारियों की रहती है नजर
नाहन। हर वर्ष गर्मियों के सीजन में वन क्षेत्रों में आगजनी के मामले बढ़ जाते हैं। इससे वनों के बीच जीव जंतुओं के पेयजल स्रोतों के आसपास अवैध शिकारियों की चौकस नजर रहती है। इन दिनों विभिन्न स्थलों पर आगजनी हो रही है जिससे वन्य जीवों मोर, सांप, चीतल, जंगली सुअर, खरगोश समेत वन्य जीवों पर खतरा मंडराता है। आग से बचने व पानी की तलाश में भागते हुए रिहायशी इलाकों की तरफ भागते हैं जिसका शिकारी पूरा फायदा उठाते हैं। इन दिनों जंगली मुर्गों व मोर के अंडे देने का सीजन होता है। छोटे बच्चे होने पर ये वन्य जीव खतरा होने पर भी नहीं भाग पाते हैं। आगजनी से सबसे ज्यादा इन वन्य जीवों के जलने का खतरा रहता है।