पांवटा साहिब (सिरमौर)। सिविल अस्पताल पांवटा में बच्चा बदलने के आरोप बेबुनियाद निकले। दो बार इस मामले में डीएनए रिपोर्ट के लिए सैंपल लैब को भेजे गए थे। अब, लैब से जांच की रिपोर्ट मिल गई है। आरोप लगाने वाले दंपति के साथ नवजात बच्ची के डीएनए मिल गए हैं। इसके बाद अस्पताल प्रबंधन ने भी राहत की सांस ली है।
एसपी सिरमौर सौम्या साम्बशिवन ने शनिवार को पत्रकार वार्ता में जानकारी दी। एसपी ने कहा कि डीएनए टेस्ट रिपोर्ट से पूरी तरह खुलासा हो गया है। आरोप लगाने वाले चौपाल के विगरोली निवासी जगदीश चंद को लैब रिपोर्ट की जानकारी दे दी गई है। एसपी ने कहा कि इस मामले की गहनता से पुलिस ने जांच की। डीएनए विशेषज्ञ डॉ. विवेक सहजपाल का सहयोग अहम रहा। इस मामले में किसी तरह का संशय नहीं रहा। अब रिपोर्ट आने पर शिकायतकर्ता को भी साफ शब्दों में कह दिया है कि लड़का या लड़की किसी को कम नहीं आंकना चाहिए। शिकायतकर्ता के पास 4 बच्चियां हैं। इनको बोझ न समझें। इनकी बेहतर परवरिश करें। इस दौरान डीएसपी प्रमोद चौहान व थाना प्रभारी अशोक चौहान मौजूद रहे।
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लगाए गए आरोप निकले बेबुनियाद ...
चौपाल के ग्राम विगरोली निवासी जगदीश चंद पुत्र नैन सिंह ने 15 फरवरी को शिकायत दर्ज करवाई। जिसमें 13 फरवरी की रात करीब को 12 बजे उनकी बीबी की डिलीवरी हुई। आरोप था कि 5 घंटे बाद अस्पताल प्रशासन ने नवजात बच्ची की जानकारी दी। अस्पताल की डिस्चार्ज स्लीप में कटिंग भी की गई थी। कटिंग कर मेल की जगह फीमेल लिखा गया था।
इस मामले को लेकर 15 फरवरी को एसपी को शिकायत भेजी गई। आईओ नौखराम की टीम ने जांच शुरू की। दो बार सैंपल जुन्गा एसएफएल लैब जांच को भेजे। अब, रिपोर्ट मिलने पर अस्पताल प्रबंधन पर लगे आरोप बेबुनियाद साबित हो गए हैं।