नाहन (सिरमौर)।
डॉ. यशवंत सिंह परमार मेडिकल कॉलेज में इलेक्ट्रिक पैनल में हुई आगजनी की घटना से कॉलेज प्रबंधन की लापरवाही भी सामने आई है। इलेक्ट्रिक पैनल के तामझाम से भरे कमरे को एक तरह से स्टोर बना दिया गया गया था। शॉट सर्किट के बाद पैनल के बीच रखे कबाड़ ने आग में घी का काम कर दिया। इसके लिए कौन जिम्मेदार है। किसने सामान इस संवेदनशील कमरे में रखा ? इसकी जांच के लिए मेडिकल कॉलेज प्रबंधन ने अब कमेटी का गठन किया है।
जानकारों की मानें तो इलेक्ट्रिक पैनल का कमरा साफ-सुथरा रहना चाहिए। अस्पताल के भवन को जाने वाली बिजली के तमाम तामझाम इसी कमरे में थे। बड़े-बड़े पैनल वाले इस कमरे में ठूंस-ठूंस कर कबाड़ का सामान भरा गया था। आग बुझाने के बाद वहां पर फिनाइल की कैनियां, ग्लबज, झाड़ू, पोचे और प्लास्टिक की पाइपें जैसा सामान मिला।
शॉट सर्किट के बाद इस सामग्री में आग तेजी से भड़क गई। सवाल यह है कि क्या मरीजों की जिंदगी से इसी तरह खिलवाड़ होता रहेगा। सौभाग्य यह रहा कि समय रहते आग पर काबू पाया गया और कोई जानी नुकसान नहीं हुआ।
बताया जा रहा है कि भवन के वार्ड में सांस की तकलीफ से ग्रस्त मरीज भी दाखिल थे। धुएं की वजह से उन्हें और दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
उधर, मेडिकल कॉलेज प्रबंधन ने भी इस मामले पर कड़ा संज्ञान लिया है। ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो इसके लिए मामले की कड़ी जांच के आदेश दिए गए हैं। किसने इलेक्ट्रिक पैनल के कमरे में यह सामान ठूंसा। इसके लिए कौन जिम्मेदार है। इस बारे संबंधित कर्मचारियों से भी पूछताछ होगी। मेडिकल कॉलेज की प्रधानाचार्य डॉ. जय श्री शर्मा ने बताया कि मामले की कड़ी जांच की जाएगी। इसके लिए चिकित्सा अधीक्षक डॉ. पराशर की निगरानी में लगभग आधा दर्जन सदस्यों की कमेटी बनाई गई है। इनमें लोनिवि और विद्युत बोर्ड के अधिकारी भी शामिल किए गए हैं। पांच दिन के भीतर कमेटी को जांच रिपोर्ट सौंपनी होगी।