नाहन (सिरमौर)।
जनपद सिरमौर के सरकारी स्कूलों में हुई फर्नीचर और स्पोर्ट्स के सामान की खरीद में गड़बड़झाले की आशंका को देखते हुए शिक्षा विभाग ने जांच बिठा दी है। पुरूवाला स्कूल के प्रधानाचार्य यशपाल को जांच का जिम्मा सौंपा गया है। जबकि सामान सप्लाई करने वाले हस्तशिल्प एवं हथकरघा निगम की बिलिंग भी फिलहाल रोकी गई है। उप शिक्षा निदेशक उच्च शिक्षा प्रधानाचार्य से 17 मार्च तक जांच पूरी कर रिपोर्ट मांगी है।
सिरमौर जिले के दस आदर्श विद्यालयों के लिए फर्नीचर, स्पोर्ट्स के सामान सहित अन्य सामग्री की खरीदारी हुई है। शिक्षा विभाग के अनुसार प्रत्येक विद्यालय के लिए 21.50 लाख रुपये स्वीकृत हुए थे। सामान की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठे हैं।
मीडिया में मामला उजागर होने के बाद शिक्षा उप निदेशक (उच्च शिक्षा) सुधाकर शर्मा ने पूरे मामले की जांच के आदेश दिए हैं। वहीं, संबंधित स्कूलों के प्रधानाचार्यों को पत्र जारी कर यह भी कहा गया है कि सामान की गुणवत्ता वह स्वयं चेक करें। गुणवत्ता को लेकर स्कूल प्रबंधन जिम्मेवार होगा। इसके अलावा फर्नीचर और अन्य सामान की खरीद की बिलिंग को फिलहाल रोका गया है। स्कूलों के पहुंचे सामान को भी इस्तेमाल नहीं करने को कहा गया है। उप निदेशक ने बताया कि जब तक जांच पूरी नहीं होती तब तक सामान यथास्थिति में रहेगा। यदि सामान की गुणवत्ता सही नहीं पाई गई तो उसे वापस किया जाएगा। उनके अनुसार प्रत्येक स्कूलों को 21.50 लाख रुपये स्वीकृत हुए हैं। इनमें से लगभग दस लाख रुपये से खेल का सामान खरीदा गया है जिनकी गुणवत्ता को लेकर सवाल उठे हैं। पुरूवाला स्कूल के प्रधानाचार्य यशपाल को जांच अधिकारी नियुक्ति करते हुए 17 मार्च तक पूरी रिपोर्ट सौंपने के आदेश दिए गए हैं।
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आखिर क्यों खरीदा जा रहा महंगा सामान
शिक्षा विभाग के तहत रेट कांट्रेक्ट किए जाते हैं। इसी के अनुसार सामान की खरीदारी होनी चाहिए थी लेकिन रेट कांट्रेक्ट्रों की बजाय सामान हस्तशिल्प एवं हथकरघा निगम से खरीदा जा रहा है। इस संदर्भ में रेट कांट्रेक्टर निशि कांत ने मुख्यमंत्री, शिक्षा निदेशक और शिक्षा मंत्री को शिकायत पत्र भेजकर साफ कहा है कि सामान रेट कांट्रेक्ट से अधिक दामों पर खरीदा जा रहा है। उन्होंने सामान खरीद में धांधली के भी आरोप लगाए हैं। हालांकि, उप निदेशक का कहना है कि रेट कांट्रेक्ट उच्च स्तर पर ही तय होते हैं। जिला से सिर्फ ऊपर तय किए गए रेट कांट्रेक्ट के आधार पर ही खरीदारी होती है।