नाहन(सिरमौर)। जिले में अमूल्य वन संपदा व वन्य जीवों पर आगजनी से खतरा मंडरा रहा है। अभी गर्मियाें का शुरुआती माह का समय ही है लेकिन वन वृत्त नाहन में दशकों पुराने आग लगने के रिकार्ड टूट गए हैं। पूरे वर्ष में आग लगने के जितने मामले होते थे, उससे कहीं ज्यादा घटनाएं 32 दिनों में हो चुकी हैं।
वन्य क्षेत्रों में हिमाचल प्रदेश में इस वर्ष आग लगने के कुल 522 मामलों में से 214 नाहन वृत्त के शामिल हैं। 1 अप्रैल से 2 मई 2016 तक, नाहन वन वृत्त क्षेत्रों में 214 आग लगने के मामले हुए। इसमें करीब 3400 हेक्टेयर वन भूमि प्रभावित हुई है। अधिकतर वन स्थलों में आग पर नियंत्रण पा लिया है। अब, अमूल्य वन संपदा की क्षति का आकलन (मेपिंग) किया जाएगा।
‘अमर उजाला’ टीम ने जिला सिरमौर में वर्ष दर वर्ष आग लगने के आंकड़े व प्रभावित क्षेत्र के आंकड़े एकत्र किए। इस वर्ष केवल 32 दिनों के भीतर आग लगने की घटनाओं के आंकड़े काफी चौंकाने वाले हैं। जबकि, गर्मी का तो अभी सीजन ही शुरू ही हुआ है। अप्रैल माह 2016 में 174 आग लगने के मामलों में 2900 हेक्टेयर तथा 1 व 2 मई को 40 मामलों में 500 हेक्टेयर भूमि आग से प्रभावित हो चुकी है। अभी गर्मियों के सबसे संवेदनशील मई व जून माह आने हैं जिससे, इस वर्ष आग लगने के शताब्दियों के रिकार्ड टूट सकते हैं।
बॉक्स के लिए----
- वर्ष आग के मामले आग से प्रभावित क्षति(हेक्टेयर में)
2011-12 137 2010 हेक्टेयर
2012-13 213 3470
2013-14 20 214
2014-15 76 751
2015-16 86 1201
2016-17 214 3400 हेक्टेयर
(केवल 1 अप्रैल 2016 से 2 मई 2016 तक)
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- नाहन वन वृत्त में 271 बीट में से 173 संवेदनशील
100 फायर वाचर तैनात, अरण्यपाल के पास रोज रिपोर्ट
नाहन(सिरमौर)। रिकार्ड आग लगने के मामले अप्रैल माह में ही आ चुके हैं। केवल 32 दिनों में 214आग के मामले पहुंचे हैं। वन विभाग के अरण्यपाल कार्यालय नाहन में रोज आग लगने की रिपोर्ट मंगवाई जा रही है जिसकी सूचना प्रदेश सरकार, वन मंत्री व विभागीय उच्चाधिकारियों को भेजी जाती है। नाहन वन वृत्त में कुल 271 वन बीट हैं। इनमें से 173 संवेदनशील है। इसलिए, नाहन वन वृत्त में नाहन मंडल, पांवटा मंडल, रेणुकाजी, राजगढ़ व सोलन वन मंडल भी शामिल है। नाहन वृत्त में करीब 100 फायर वाचर तैनात हैं जिससे कई आग के मामलों को समय रहते काबू कर लिया गया।
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आखिर क्यों लग रही इतनी वन्य क्षेत्रों में आग
-वन्य क्षेत्रों में रिकार्ड आग लगने के मामले चौंकाने वाले हैं। आग लगने के प्रमुख कारणों में जागरूकता की कमी, वन क्षेत्र में धूम्रपान के दौरान लापरवाही, अच्छी घास की लालसा से घासनियों में आग का घने जंगल तक पहुंचना, संवेदनशील क्षेत्रों में शरारती तत्वों की आशंका, तेंदुओं समेत खतरनाक वन्य जीवों से भय, जंगल झाड़ियों को नष्ट करने के प्रयास, सूखी लकड़ी की चाहत तथा वन्य जीवों को अवैध शिकार की लालच में घेरने समेत कई कारण माने जा रहे हैं।
उधर, वन विभाग वृत्त नाहन के अरण्यपाल वाईपी गुप्ता ने कहा कि आग लगने के मामलों में पिन प्वाइंट करना काफी कठिन है लेकिन अधिकतर वन्य आग की घटनाएं लापरवाही के चलते होती हैं। नाहन वृत्त में 100 फायर वाचर रखे गए हैं जिससे आग पर समय रहते काबू पाया जा सके। आग पर काबू पाने में वन विभाग कर्मी व ग्रामीण रात दिन मशक्कत कर रहे हैं जिससे आग के अधिकतर मामलों को शीघ्र ही काबू कर लिया गया।
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वन्य विभाग-ग्रामीणों में समन्वय जरूरी : वाईपी गुप्ता
- नाहन वन वृत्त के अरण्यपाल वाईपी गुप्ता ने कहा कि प्रतिदिन फायर रिपोर्ट मंगवाई जा रही है। वन्य क्षेत्र में आग लगने से अमूल्य वन संपदा को क्षति पहुंचती है। इससे बेशकीमती जड़ी बूटियां, जैव विविधता वन्य जीव, नए उगने वाले पौधे तथा आक्सीजन देेेने वाले पेड़ पौधों को क्षति पहुंचती है। इसलिए वन्य आग मामलों में जागरूकता बेहद जरूरी है। वन्य क्षेत्रों के आसपास गांव के लोगों को आगजनी पर काबू पाने में सहयोग करना जरूरी है। आपसी समन्वय व सहयोग से आगजनी को जंगल के विस्तृत क्षेत्र में फैलने से रोका जा सकता है। अब तक नाहन वन वृत्त में आग की घटनाओं पर काबू पा लिया गया है।