पांवटा साहिब (सिरमौर)।
उत्तराखंड-हिमाचल सीमा पर यमुना नदी में अवैध खनन रोक पाना किसी चुनौती से कम नहीं है। उत्तराखंड पुलिस चेक पोस्ट के नाक तले अवैध खनन का कार्य जारी है लेकिन कार्रवाई के नाम पर कुछ नहीं हो रहा है। ऐसे में अवैध खनन माफियाओं की दोनों राज्यों में ऊंची पहुंच साफ नजर आने लगी है।
लिहाजा, प्रशासन और विभाग के अधिकारी भी खननकारियों पर हाथ डालने से कतरा रहे हैं। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा रहा है कि राज्य सीमा पर लगी बुर्जियां हटाने तक की हिमाकत भी माफियाओं ने कर दिखाई है। ऐतिहासिक यमुनाघाट स्थल, गुरुद्वारा साहिब, दो राज्यों को जोड़ने वाले एनएच-7 के यमुना पुल, श्री राधाकृष्ण हनुमान मंदिर व हाईटेंशन बिजली टॉवर क्षेत्र में यमुना नदी क्षेत्र पर बेखौफ होकर अवैध खनन को अंजाम दिया जा रहा है।
मामला मीडिया की सुर्खियों में आने पर वीरवार को दिनदहाड़े सैकड़ों ट्रैक्टर भरने का कार्य तो रुक गया लेकिन अवैध खनन बदस्तूर जारी रहा। खननकारी नदी में कई फुट गहरे खड्डे में आराम से दिन भर बेलचा चलाते रहे।
अवैध खननकारी हिमाचल-उत्तराखंड सीमा के एनएच-7 पर बने यमुना पुल की जड़ों तक खनन करते पहुंच गए हैं। इनको रोकने में कोई विभाग आगे नहीं आ पाया है। पुल से पांवटा बैराज तक खूब खनन का बेलचा चल रहा है। सारे नियम और कानून ठेंगे पर रख दिए हैं। यहां तक कि दोनों राज्यों की नदी सीमा में लगे हाईटेंशन बिजली टावर के आसपास भी जमकर खुदाई जारी है जिससे आने वाले बरसात के मौसम में नदी के बहाव बदलने से क्षति हो सकती है। नदी में गहरे गहरे खड्डे कर दिए हैं। इन स्थलों पर पानी भरने पर बाहरी राज्यों से पहुंचने वाले अनजान पर्यटक व श्रद्धालु डूब सकते हैं। वीरवार को दिनदहाड़े खनन कार्य बेरोकटोक चलता रहा। शाम ढलते ही खनन कर निकाली गई रेत बजरी को माफिया उत्तराखंड पहुंचाने की फिराक में थे।
उधर, जिला खनन अधिकारी सुरेश भारद्वाज ने बताया कि यह मामला उत्तराखंड प्रशासन की नोटिस में लाया गया है। हिमाचल क्षेत्र में अवैध खनन के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
वहीं, एनएच विभाग अधिशाषी अभियंता वीके अग्रवाल ने बतायाकि अवैध खनन से यमुना पुल को खतरा संभव है। इसलिए, उत्तराखंड प्रशासन से संपर्क किया जाएगा।