नाहन (सिरमौर)। पैतृक संपत्ति के बंटवारे को लेकर चल रहे विवाद में अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायालय ने फैसला सुनाते हुए राजेश कुमार व अन्य की सिविल अपील खारिज कर दी है। अदालत ने सिविल जज नाहन की ओर से 30 अगस्त 2025 को दिए गए फैसले और डिक्री को बरकरार रखते हुए स्पष्ट किया कि विवादित संपत्ति संयुक्त है और चारों भाइयों के उत्तराधिकारी अपने-अपने हिस्से के हकदार हैं। राजीव कुमार व अन्य ने संपत्ति में हिस्सेदारी और विभाजन के लिए सिविल मुकदमा दायर किया था। उनका कहना था कि यह संपत्ति स्वर्गीय फिना से उनके चार बेटों राम किशन, राम स्वरूप, टीका राम और तुलसी राम को बराबर हिस्से में मिली थी। दलील दी गई कि संपत्ति पहले ही 1967-70 की कार्रवाई में बांटी जा चुकी थी। हालांकि अदालत ने रिकॉर्ड की जांच में पाया कि उस पुराने विभाजन की डिक्री मौके पर लागू नहीं हुई थी। बाद में 1982 के एक अन्य सिविल मामले में 1967 के फैसले और डिक्री को शून्य घोषित किया गया था। अदालत ने कहा कि वर्ष 2012-13 की जमाबंदी से भी संपत्ति का संयुक्त होना सामने आता है। रिकॉर्ड पर ऐसा कोई ठोस साक्ष्य नहीं आया, जिससे यह साबित हो सके कि संपत्ति का वैध और अंतिम बंटवारा हो चुका था। अदालत ने माना कि चारों भाइयों के उत्तराधिकारी विवादित संपत्ति में अपने-अपने हिस्से के हकदार हैं। अदालत ने संपत्ति के मूल्यांकन से जुड़ी आपत्ति भी खारिज कर दी। संवाद