नाहन। अतिरिक्त सत्र न्यायालय ने एक आवेदन को मंजूर करते हुए अपील दाखिल करने में हुई 14 दिन की देरी को माफ कर दिया। अदालत ने माना कि आवेदक नारायण सिंह को कानूनी प्रावधानों की पूरी जानकारी नहीं थी और वह इस गलतफहमी में थे कि फैसले को चुनौती देने के लिए 90 दिन की अवधि उपलब्ध है। अदालत ने इसे सद्भावना में हुई देरी माना। मामला शिलाई स्थित न्यायिक दंडाधिकारी की अदालत के 22 अक्तूबर 2024 के बरी करने के फैसले के खिलाफ अपील से जुड़ा है। उक्त मामले में आरोपी इंद्र सिंह सहित अन्य 18 आरोपियों को आईपीसी की धारा 147, 149 और 506 तथा सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के तहत आरोपों से बरी किया गया था। अदालत के समक्ष बताया गया कि नारायण सिंह ने फैसले की प्रमाणित प्रति 22 नवंबर 2024 को प्राप्त की थी। उन्हें बाद में स्पष्ट हुआ कि पीड़ित के तौर पर अपील 60 दिन की अवधि के भीतर दायर की जानी थी। वहीं, मामले की कार्यवाही के दौरान मूल आवेदक नारायण सिंह की मृत्यु हो गई थी। अदालत ने 11 अगस्त 2026 के आदेश के आधार पर उनके परिजनों को कार्यवाही आगे बढ़ाने की अनुमति दी। संवाद