मेडिकल कालेज नाहन में उपचाराधीन इंद्रावती के पति प्रेम सिंह। संवाद
भरोग बनेड़ी की इंद्रवती चार माह से काट रही अस्पतालों के चक्कर
संवाद न्यूज एजेंसी
नाहन (सिरमौर)। धारटीधार के भरोग बनेड़ी का एक परिवार गुरबत भरी जिंदगी जीने के लिए विवश हो गया है। इलाज के लिए न पैसा है और न ही खाने-पीने के लिए। बीपीएल से संबंध रखने वाले इस परिवार को अब सिर्फ मदद की दरकार है।
खेतीबाड़ी और मजदूरी से परिवार अच्छे तरीके से पल रहा था। अब पति को अस्पताल पहुंचाने के लिए भी महिला के पास पैसे नहीं हैं। उधार मांगकर पति को निजी वाहन करके अस्पताल पहुंचाना पड़ रहा है।
पति को बचाने के लिए पिछले कई माह से अस्पतालों के चक्कर काट रही हैं। पति की बीमारी ने एक मां को बच्चों से भी दूर कर दिया है। भरोग बनेड़ी गांव के प्रेम सिंह की दोनों किडनियां खराब हो गई हैं। इसका पता परिवार को चार माह पहले चला। इंद्रावती अपने पति को बचाने के लिए अस्पतालों के चक्कर काट रही है।
पहले पीजीआई चंडीगढ़ में डेढ़ महीने पति का इलाज कराया। पिछले ढाई माह से वह मेडिकल काॅलेज नाहन में अपने पति का डायलिसिस करवा रही हैं। नाहन में किराये पर कमरा खरीदने के लिए उसके पास पैसे नहीं थे तो भाजपा नेता विनय गुप्ता ने उनका हिंदू आश्रम में रहने का प्रबंध कराया। हिंदू आश्रम से अस्पताल और वापस लाने के लिए 400 रुपये गाड़ी का खर्च आ रहा है। अब स्थिति ऐसी हो गई है कि अस्पताल ले जाने के लिए भी परिवार के पास पैसा नहीं बचा है।
इंद्रावती का कहना है कि परिवार की आर्थिक स्थिति पहले ही काफी नाजुक है। अब खाने-पीने के लिए भी पैसा नहीं बचा है। सरकार और जिला प्रशासन से गुहार लगाई कि मदद की जाए।