अमर उजाला ब्यूरो
सराहां (सिरमौर)। जनपद सिरमौर के पच्छाद इलाके में भारी ओलावृष्टि ने किसानों की कमर तोड़ कर रख दी है। आधा दर्जन से अधिक फसलें ओलावृष्टि के कहर से बर्बाद हो गई हैं। नकदी फसलें बर्बाद होने से किसानों की उम्मीदों पर पानी फिर गया है। किसानों को अब रोजी-रोटी की चिंता सताने लगी है। पच्छाद क्षेत्र की आधा दर्जन पंचायतों में सोमवार को हुई भारी ओलावृष्टि से मटर, गोभी, तोड़िया, धनिया, लहसुन, प्याज और गेहूं की फसल को नुकसान पहुंचा है। क्षेत्र में इतनी ओलावृष्टि हुई है कि अधिकतर फसल को नुकसान पहुंचा है। पच्छाद क्षेत्र की धार-टिक्करी पंचायत के कई गांवों में करीब एक से डेढ़ फुट तक ओलावृष्टि हुई, जिससे क्षेत्र में की फसलें तहस-नहस हो गईं। पच्छाद क्षेत्र की धार-टिक्करी, डिंगर किन्नर, लाना-बांका, मानगढ़ और बनाह धिन्नी पंचायतों में बारिश के साथ अचानक ओलावृष्टि हुई। क्षेत्रवासी सुरेश शर्मा, मोहर सिंह, विनोद कुमार, चंद्रमोहन, सुनील दत्त, आशा ठाकुर, रीना ठाकुर, नीलम ठाकुर, राजेंद्र सिंह, प्रेम सिंह, कमलेश देवी, संतोष और प्रेम सिंह ने बताया कि उन्होंने अपने खेतों में मटर, गोभी, लहसुन, प्याज, धनिया और गेहूं समेत कई फसलें बीजी हैं। इससे पहले अच्छी बारिश होने से फसलों की पैदावार भी अच्छी हो रही थी लेकिन, सोमवार शाम भारी ओलावृष्टि से किसानों की उम्मीदों पर पानी फिर गया। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में बड़े पैमाने पर किसान हर साल नकदी फसल बीजते हैं। किसान फसलों के सहारे ही अपनी आजीविका चलाते हैं। ऐन वक्त पर ओलावृष्टि से पूरा क्षेत्र प्रभावित हुआ है। उन्होंने मांग की है कि सरकार और प्रशासन नुकसान का मुआवजा निर्धारित करके किसानों को मुआवजा उपलब्ध करवाएं। उधर कृषि विषयवाद विशेषज्ञ डॉ. प्यारेलाल ने बताया कि क्षेत्र में हुई ओलावृष्टि की सूचनाएं कार्यालय पहुंच रही हैं। उन्होंने कहा कि कृषि विभाग नुकसान की रिपोर्ट तैयार कर उच्च अधिकारियों को भेजेगा।