ददाहू (सिरमौर)। सरकारी स्कूलों में लगाई जा रही प्री-प्राइमरी की कक्षाएं शिक्षा विभाग के लिए कड़ी चुनौती साबित हो रही हैं। प्री-प्राइमरी कक्षाओं में दाखिला ले चुके नौनिहालों को दोपहर का भोजन नहीं मिल रहा। राज्य सरकार ने योजना तो शुरू कर दी, लेकिन दोपहर के भोजन की व्यवस्था को लेकर साफ गाइड लाइन नहीं है। भोजन मिड डे मील के तहत दिया जाएगा या फिर आंगनबाड़ी केंद्रों की ओर से। इसके बारे में स्पष्ट निर्देश नहीं है। प्रारंभिक शिक्षा खंड ददाहू के सात स्कूलों में प्री-प्राइमरी की कक्षाएं आरंभ हो चुकी हैं, जिनमें 102 बच्चे दाखिला भी ले चुके हैं। लेकिन, बच्चों को दोपहर का भोजन नहीं मिल रहा है। हैरानी की बात यह है कि इन बच्चों को पढ़ाने के लिए अध्यापकों की भी कोई व्यवस्था अलग से नहीं की गई है। जानकारी के मुताबिक केवल ददाहू स्कूल में ही 20 बच्चों को दोपहर का भोजन मिल रहा है। शेष छह स्कूलों के 82 नौनिहालों को भोजन नहीं मिल रहा। इन सभी बच्चों का दाखिला आंगनबाड़ी केंद्रों में माध्यम से ही प्री-प्राइमरी स्कूलों में हुआ है। ऐसे में ये बच्चे घरों से अपना टिफिन लाने पर विवश हो रहे हैं। प्रदेश सरकार ने सरकारी स्कूलों में छात्रों की संख्या बढ़ाने के मकसद से इस योजना को चलाया था लेकिन यह योजना नौनिहालों पर ही भारी पड़ती दिखाई दे रही है। उधर, प्रारंभिक शिक्षा उपनिदेशक नाहन विपिन कुमार ने बताया कि इस मामले में शीघ्र जांच कर प्री-प्राइमरी के बच्चों के लिए भोजन का प्रावधान किया जाएगा। सभी स्कूलों में इन बच्चों को दोपहर का भोजन देने के आदेश दिए जाएंगे। महिला एवं बाल विकास के सीडीपीओ नाहन सुनील शर्मा ने बताया कि केवल आंगनबाड़ी के बच्चों के लिए भोजन की व्यवस्था उनका विभाग करेगा। प्री-प्राइमरी स्कूलों में दाखिला ले चुके बच्चों के भोजन की जिम्मेदारी शिक्षा विभाग की है।