अमर उजाला ब्यूरो
शिलाई (सिरमौर)। शिलाई के विधायक हर्षवर्धन चौहान ने कहा है कि मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने अंतरराष्ट्रीय मेले के दौरान रेणु मंच से लोक भवन की घोषणा कर असंवैधानिक हस्तक्षेप किया है। लोक भवन की घोषणा करना विधायक के संवैधानिक अधिकार में है। मुख्यमंत्री बिना विधायक की राय के यह घोषणा नहीं कर सकते। यह प्रावधान कैबिनेट की बैठक में पास हुआ है। हर्ष शिलाई में पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। उन्होंने कहा कि भाजपा के नुमाइंदे जनता को गुमराह कर रहे हैं। शिलाई में कोर्ट खोलने की घोषणा करके झूठा श्रेय लेने की कोशिश की जा जरही है। शिलाई में जमीन उपलब्ध न होने तथा बार काउंसिल का गठन न होने से 25 साल से शिलाई के नाम से पांवटा साहिब में कोर्ट नंबर-2 चल रहा है। गत वर्ष ही कांग्रेस सरकार के समय में विधिक विभाग के अधिकारियों ने शिलाई में आकर जगह का निरीक्षण किया है। अब इस मामले में भाजपा सरकार और उसके नुमाइंदे झूठा श्रेय लेने की कोशिश कर रहे हैं। हर्षवर्धन ने कहा कि सतौन में आईटीआई को लेकर भी राजनीति की जा रही है। तत्कालीन मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने सतौन में आईटीआई खोलने की घोषणा करके दस्तावेज भारत सरकार को भेजे थे। हैरत की बात है कि भाजपा के लोग इसे भी अपनी उपलब्धि में गिनवा रहे हैं। हषर्वधन चौहान ने मुख्यमंत्री को आड़े हाथ लेते हुए कहा कि विधानसभा में मुख्यमंत्री लोक भवन योजना का नियम बना है। इसके तहत प्रत्येक विधानसभा में एक-एक मुख्यमंत्री लोकभवन बनना है। यही नहीं, यह भी प्रावधान रखा गया है कि इसकी घोषणा स्थानीय विधायक करेगा और उसके लिए 30 लाख रुपये मुख्यमंत्री फंड से दिया जाएगा। इसके अलावा यदि किसी विधानसभा में दो भवन बनते हैं तो दूसरे भवन का 50 फीसदी बजट विधायक निधि और 50 फीसदी मुख्यमंत्री को देना होगा। यह सब कैबिनेट की बैठक में पास हुआ है। ऐसे में मुख्यमंत्री ने रेणु मंच से विधायक की राय के बिना इसकी घोषणा करके असंवैधानिक हस्तक्षेप किया है। इस बात को विधानसभा में उठाया जाएगा। उन्होंने कहा कि भाजपा नेता जो चाहे कर लें, जनता अब झूठी वाहवाही के झांसे में नहीं आने वाले हैं। आने वाले लोकसभा चुनाव में जनता भाजपा को पटकनी देकर रहेगी।