धारटीधार के फौजी यशपाल की पार्थिव देह को लेकर जाते ग्रामीण।
- फोटो : अमर उजाला ब्य़ूरो
ददाहू (सिरमौर)। भारतीय सेना के 14 जैक राइफल में हवलदार के पद पर तैनात सैनिक यशपाल का शुक्रवार को राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। इस मौके पर धारटीधार क्षेत्र के सैकड़ों लोग मौजूद रहे। सैनिक को सेना के प्रथम पैरा के जवानों, माजरा और रेणुका पुलिस की टुकड़ी ने सलामी दी। वीरवार मध्य रात्रि को ही उनका शव दिल्ली से उनके पैतृक गांव बाडथल पहुंचा दिया गया था। शुक्रवार को उनके दो बेटों मानस और दक्ष ने उन्हें मुखाग्नि दी। इस दृश्य को लेकर वहां मौजूद सभी लोगों की आंखें नम हो गईं। यशपाल के परिवार के नौ लोग सेना में हैं। उनके पिता अलबेल सिंह भी वर्ष 1995 में सेना से ही सेवानिवृत्त हुए थे। दिवंगत यशपाल सिंह हाल ही में चार माह की छुट्टी काट कर डलहौजी लौटो थो। जहां बुधवार को उन्हें ट्रेनिंग के दौरान दिल का दौरा पड़ा, जिसके बाद उन्हें पठानकोट अस्पताल ले जाया गया। यहां से उन्हें दिल्ली रेफर किया गया। यहां उपचार के दौरान उसने दम तोड़ दिया। उनकी मृत्यु के बाद उनके पिता अलबेल सिंह, माता कृष्णा देवी, पत्नी बीना व उनके दोनों मासूम बच्चों पर दु:खों का पहाड़ टूट पड़ा है। दिवंगत सैनिक के बड़े भाई जगमोहन सिंह ने कहा कि यशपाल भाइयों में सबसे छोटा था। उसकी मृत्यु पर पूरे गांव में शोक की लहर है।