शिलाई (सिरमौर)। गिरिपार क्षेत्र में भारतीय नववर्ष के आगमन पर बीशू मेले की तैयारियां इन दिनों जोरों पर चल रही हैं। लोग अपने घरों और आंगन के सफाई कार्यों में जुटे हुए हैं। जब खेतों से नई फसल घर आती है तो उस समय लोग बीशू मेले में जाने के लिए सभी सदस्यों के लिए नए वस्त्र और जूते खरीदे जाते हैं। समूचे गिरिपार क्षेत्र में बीशू मेला एक पर्व की तरह आयोजित किया जाता है। क्षेत्र में कई जगहों पर इन मेलों का आयोजन होता है। देवी-देवताओं के नाम पर आयोजित होने वाले इन मेलों को लोग बड़ी श्रद्धा के साथ मनाते हैं। देवताओं की छड़ियां ढोल-नगाड़ों और जातर के साथ मेले में पहुंचती हैं। मेले में जहां गांव की युवतियां और महिलाएं रासा गीत गाती हैं। वहीं, कई मेलों में ठोडा नृत्य और प्रतियोगिताएं भी होती हैं। गिरिपार क्षेत्र के लाधि-महल के नैनीधार और मस्तभोज के शरली से बीशू मेलों का दौर शुरू वाला है। क्षेत्र के गिरनोल, शिलाई, सुइनल, कफोटा, कांडो-दुगाना, कमराऊ तिलोरधार, कांटी मशवा, सतौन, कोटि-बोंच में आयोजित होने वाले मेले एक सप्ताह तक चलते हैं। इन मेलों को लेकर सभी ग्रामीण तैयारियों में जुटे हुए हैं।