मतियाना की सोनार घाटी में चीड़ से सुंदर, उपयोगी और पर्यावरण अनुकूल उत्पाद तैयार करती महिलाएं। स
पत्तियों से बना रहीं कान्हा की टोकरी, पूजा की थाली, ट्रे और चपाती बॉक्स
संवाद न्यूज एजेंसी
ठियोग (रामपुर बुशहर)। ठियोग में महिलाएं चीड़ की पत्तियों से रोजगार बुन रही हैं और आत्मनिर्भर बन रही हैं। वे चीड़ की पत्तियों से कई तरह के घरेलू और सजावट के उत्पाद बना रही हैं और बाजार में बेचकर अपनी आमदनी का मजबूत बना रही हैं। पत्तियों से बनाई कान्हा की टोकरी, पूजा की थाली, ट्रे और चपाती बॉक्स लोगों को बहुत पसंद आ रहे हैं। मतियाना की सुरम्य सोनार घाटी में क्लस्टर फाउंडेशन की ओर से 20 दिवसीय विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम ने ग्रामीण महिलाओं ने प्रशिक्षण प्राप्त किया। इसके बाद महिलाओं ने चीड़ की पत्तियों से उत्पाद बनाने शुरू किए। क्लस्टर फाउंडेशन से जुड़ीं शीला, मीना, सुनीता और पायल ने बताया कि उनके उत्पादों को बाजार में अच्छी कीमत मिल रही हैं और लोग काफी पसंद कर रहे हैं। ये उत्पाद न केवल देखने में आकर्षित हैं, बल्कि स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से भी लाभकारी हैं। विशेष रूप से चीड़ से बना चपाती बॉक्स मधुमेह से पीड़ित लोगों के लिए उपयोगी माना जा रहा है, क्योंकि यह रोटियों को सुरक्षित और संतुलित अवस्था में रखने में सहायक होता है। इस पहल की सबसे खास बात यह है कि महिलाएं जंगलों से गिरे हुईं चीड़ की पत्तियों को एकत्रित कर उसे उपयोगी उत्पादों में बदल रही हैं। इससे एक ओर जंगलों में आग लगने के खतरे को कम करने में मदद मिल रही है, वहीं दूसरी ओर महिलाएं अपने हुनर के दम पर आत्मनिर्भर बन रही हैं। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम केवल कौशल सिखाने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने महिलाओं के आत्मविश्वास को नई उड़ान दी है। अब ये महिलाएं न केवल अपने परिवार की आर्थिक मजबूती में योगदान दे रही हैं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी एक प्रेरणादायक मिसाल बनकर उभर रही हैं।