रोहडू। जुब्बल, रोहडू और टिक्कर तहसीलों के दर्जन से अधिक गांवों में वीरवार शाम को हुई भारी ओलावृष्टि ने खूब तबाही मचाई। ओलावृष्टि से सेब के साथ ही अन्य फलदार पौधों के पत्ते भी जमीन पर बिखर गए। ओलों से सेब को अधिक नुकसान पहुंचा है। प्रभावित क्षेत्र के बागवानों ने सरकार से राहत की मांग की है। वीरवार शाम के समय जुब्बल तहसील के गिल्टाड़ी, झाल्टा, झगटान, छाजपुर, नंदपुर, जबकि रोहडू और टिक्कर तहसीलों की दर्जन से अधिक पंचायतों में ओलों ने सेब और अन्य फलों की फसलों को भारी नुकसान पहुंचाया है। दर्जन से अधिक पंचायतों में करीब पांच से दस मिनट तक भारी ओलावृष्टि हुई है। किसान सभा रोहडू इकाई के अध्यक्ष सुखदेन चौहान ने बताया कि ओलावृष्टि से कई जगह बागवानों की सेब की फसल तबाह हो गई है। सेब के पत्ते और फूल जमीन पर बिखरे पडे़ हैं। सब्जियों और अन्य फसलों को भी ओलों से नुकसान पहुंचा है। उन्होंने कहा ओलावृष्टि से टिक्कर और जुब्बल तहसील के कई गांवों में नुकसान हुआ है। बागवानों को अब रोजी-रोटी की चिंता सता रही है। उन्होंने सरकार से प्रभावित क्षेत्रों में नुकसान के आकलन के बाद राहत देने की मांग की है। सरकार से आग्रह किया है कि प्रभावितों को मुआवजे का प्रावधान किया जाए। कृषि विज्ञान केंद्र रोहडू के प्रभारी डॉ. नरेंद्र कायथ का कहना है कि ओलावृष्टि के बाद बागवान करीब 72 घंटे तक किसी प्रकार की दवाई का बगीचों में छिड़काव न करें। विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार ही पौधों को बचाने के लिए दवाइयों का छिड़काव किया जा सकता है।