संवाद न्यूज एजेंसी
रोहड़ू। सेब के बगीचों में बिना मिट्टी की जांच किए उर्वरकों का उपयोग पौधों के लिए घातक साबित हो सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस समय सेब के बगीचों में मृदा परीक्षण का सबसे उपयुक्त समय है। इसके बावजूद अधिकांश बागवान आज भी परंपरागत तरीके, बिना जांच के ही रासायनिक और जैविक खादों का उपयोग कर रहे हैं। इससे न केवल पौधों की सेहत पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है, बल्कि लंबे समय में मिट्टी की उर्वरक क्षमता भी समाप्त होने लगती है। बागवानी विशेषज्ञ का कहना कि अच्छी और गुणवत्तापूर्ण सेब उत्पादन के लिए दिसंबर से फरवरी का समय खाद डालने के लिए उपयुक्त माना जाता है, लेकिन आजकल सूखे के कारण अभी तक बागवान खादोंं का उपयोग नहीं कर सके। यदि समय पर बारिश होती है, तो फरवरी से पहले बागवान खादोंं का उपयोग मिट्टी की जांच के बाद कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि बागवान हर वर्ष खादों का उपयोग तो करते हैं, लेकिन अधिकांश मामलों में मिट्टी की जांच नहीं करवाई जाती है, जो एक गंभीर चूक है। कृषि विज्ञान केंद्र की प्रभारी एवं बागवानी विशेषज्ञ डाॅ. उषा शर्मा का कहना है कि पौधों में पोषक तत्वों का संतुलन बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है। यदि बिना जांच के खादों का अधिक या कम उपयोग किया जाता है, तो इससे पौधों में पोषक तत्वों का असंतुलन पैदा हो जाता है। इसका सीधा असर पौधों की बढ़वार, फल की गुणवत्ता और उत्पादन पर पड़ता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अत्यधिक उर्वरकों के उपयोग से मिट्टी की जैविक संरचना नष्ट हो जाती है और भूमि धीरे-धीरे बंजर होने लगती है। उन्होंने बागवानों को सलाह दी है कि बगीचे के अलग-अलग हिस्सों से मिट्टी के नमूने एकत्रित कर जांच के लिए प्रयोगशाला में भेजें। मिट्टी के नमूनों को सूती थैली में भरकर, उचित तरीके से लेबल लगाकर भेजना चाहिए, ताकि जांच रिपोर्ट सटीक आ सके। मिट्टी परीक्षण की रिपोर्ट के आधार पर ही यह तय किया जाना चाहिए कि किस खाद की कितनी मात्रा की आवश्यकता है। विशेषज्ञ ने कहा मृदा परीक्षण से यह पता चलता है कि मिट्टी में नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश और अन्य सूक्ष्म पोषक तत्वों की स्थिति क्या है। इसी आधार पर संतुलित खाद प्रबंधन अपनाया जा सकता है। इससे न केवल उत्पादन बढ़ता है, बल्कि बगीचों की दीर्घकालीन उर्वरता भी बनी रहती है। उन्होंने बागवानों से अपील की है कि फरवरी तक खाद डालने से पहले अनिवार्य रूप से मिट्टी की जांच करवाएं और उसी के अनुसार खादों का उपयोग करें। इससे सेब की पैदावार में सुधार होगा। उन्होंने बागवानों से अपील की कि दिसंबर से फरवरी के बीच अनिवार्य रूप से मिट्टी की जांच करवाएं और उसी के अनुसार खादों का प्रयोग करें। इससे सेब की पैदावार में सुधार होगा और बागवानी को आर्थिक रूप से अधिक लाभकारी बनाया जा सकता है। यदि आवश्यकता पड़े को समीप के उद्यान विकास अधिकारी या फिर कृषि विज्ञान केंद्र से भी बागवान बगीचों की देखरेख के से सबंधित जानकारी फोन पर ले सकते हैं।