ढाडी घुंसा में जागरा उत्सव के दौरान मशाले जलाते ग्रामीण
देवता महाराज बनाड़, देवता देशमोलिया, देवता पवासी और देवता महासू का पारंपरिक जागरा महोत्सव संपन्न
संवाद न्यूज़ एजेंसी
रोहड़ू। रोहड़ू क्षेत्र के गांवों में जागरा महोत्सव संपन्न हो गया। सोमवार और मंगलवार को शराचली क्षेत्र के ढाडी घुंसा में देवता देशमोलिया, पुजारली में देवता बनाड और भोलाड़ में देवता पवासी के जागरा महोत्सव का आयोजन किया गया। जुब्बल और रोहड़ू क्षेत्र के गांवों में महासू देवता का जागरा मनाया गया। क्षेत्र में जागरा महोत्सव का आयोजन 13 सितंबर से शुरू हो गया था। 14 सितंबर की रात को अधिकांश गांवों में जागरा मनाया गया। 15 सितंबर की रात देवता बनाड के जागरे के साथ ही महोत्सव संपन्न हो गया है। जागरे में विशेष रूप से लकड़ी की बिंडाली (मशाल) जलाकर लोगों ने देवता का अभिनंदन किया। इस दौरान हाथ में मशाल लिए देवता के अभिनंदन में पारंपरिक गीत ..तू बरमा न जाए विरसुए.. की धुन पर लोग नृत्य करते रहे। देवता के अभिनंदन में गाए जाने वाला यह विशेष गीत हर वर्ष जागरा महोत्सव में ही देवता की स्वीकृति के बाद गाया जाता है। देवता का आशीर्वाद प्राप्त करने व गांव में सुख-समृद्धि लाने के लिए ग्रामीण रातभर पारंपरिक वाद्ययंत्रों की धुनों पर नाचते रहे। देवताओं के गूरों का नृत्य भी महोत्सव का मुख्य आकर्षण का केंद्र रहा। रातभर चले जागरा महोत्सव को देखने के लिए भारी संख्या में क्षेत्र के लोग उपस्थित रहे। देवता देशमोलिया के बजीर सुरेंद्र पनाटू ने बताया कि हर वर्ष जागरा महोत्सव पारंपरिक ढंग से मनाया जाता है। लोग देवता की पूजा मशालें जलाकर करते हैं।