प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने मेवाग से शकराल तक घाटी में अवैध डंपिंग पर सुनाया फैसला
नोटिस के बाद भी नहीं किए सुरक्षा के उपाय
संवाद न्यूज एजेंसी
रामपुर बुशहर। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने नेशनल हाईवे-पांच पर फोरलेन का निर्माण कर रही गावर कंपनी को अवैध डंपिंग करने पर तीन लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। इससे पहले कंपनी को सुरक्षा उपाय करने के लिए नोटिस भी जारी किया गया था, लेकिन कंपनी ने संतोषजनक कार्रवाई नहीं की। इसके बाद प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने कंपनी पर जुर्माना लगाया है।प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड शिमला के क्षेत्रीय अधिकारी ने 3 जुलाई को एनएच-पांच पर मेवाग से शकराल घाटी तक निरीक्षण किया था। निरीक्षण के दौरान निर्माणाधीन फोरलेन के एक नाले में बिना सुरक्षा उपाय के अवैज्ञानिक तरीके से मलबा डाला पाया गया। निर्माणाधीन पुल नंबर-1 के आसपास भी मलबा डाला गया था। इसके अलावा साइट-3 पर डंपिंग के लिए बनाए ढांचे अपर्याप्त थे। क्रेटवॉल अत्यधिक भार के कारण झुक गई थी। निरीक्षण के बाद 8 जुलाई को बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी शिमला ने कंपनी को नोटिस भेजा। नोटिस में कंपनी को इन तीनों स्थानों पर अवरोधक संरचनाओं को सुदृढ़ करने, पुल नंबर-1 के पास नाले में मलबा डालना बंद करने और नाले के पास डाले गए मलबे को उठाने के निर्देश दिए गए थे। कंपनी ने नोटिस पर कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया। 23 जुलाई को क्षेत्रीय अधिकारी ने पत्र के माध्यम से फिर अवैध डंपिंग के बारे में सूचित किया, लेकिन स्थिति नहीं सुधरी। इसके बाद क्षेत्रीय कार्यालय शिमला ने पर्यावरण क्षतिपूर्ति के रूप में प्रत्येक स्थल के लिए एक-एक लाख रुपये यानी कुल तीन लाख रुपये का जुर्माना लगाने की सिफारिश की। राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने इस सिफारिश के अनुसार गावर कंपनी को तीन लाख रुपये जुर्माना लगाया। जुर्माने को तीन दिन में जमा करने के निर्देश दिए हैं। जुर्माना नहीं भरा जाता है, तो जल प्रदूषण रोकथाम एवं नियंत्रण अधिनियम, वायु प्रदूषण रोकथाम एवं नियंत्रण अधिनियम के प्रावधानों के तहत कार्रवाई शुरू की जाएगी।