कम वेतन और अस्थायी नियुक्ति से वनों की रक्षा और अवैध कटान रोकने में आ सकती कमी : ललित
सरकार अधिसूचना को करे रद्द, पहले की तरह करे वन रक्षकों की भर्ती
संवाद न्यूज एजेंसी
रामपुर बुशहर। प्रदेश सरकार के नए फरमान पर फोरेस्टर्स वेलफेयर एसोसिएशन वन वृत्त रामपुर ने रोष जताया है। सरकार से इस फैसले पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया है। फोरेस्टर्स वेलफेयर एसोसिएशन वन वृत्त रामपुर के अध्यक्ष ललित भारती ने कहा कि सरकार की अधिसूचना के अनुसार 500 नियमित वन रक्षकों के कैडर पदों को समाप्त कर उनके स्थान पर मात्र 16 हजार रुपये के निश्चित मासिक मानदेय पर सहायक वन रक्षक रखने का निर्णय लिया गया है। यह निर्णय न केवल वन कर्मियों के हितों के साथ कुठाराघात है, बल्कि विभाग की कार्यक्षमता के लिए भी चिंताजनक है। वन रक्षक और प्रस्तावित सहायक वन रक्षक के कार्य, जोखिम और उत्तरदायित्व पूरी तरह समान हैं। ऐसे में एक ही कार्य के लिए नियमित वेतनमान के बजाय इतना अल्प मानदेय देना संवैधानिक सिद्धांतों के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि वर्तमान महंगाई के दौर में इतनी कम राशि में एक परिवार का भरण-पोषण संभव नहीं है। दुर्गम जंगलों में जान जोखिम में डालकर ड्यूटी करने वाले युवाओं के साथ यह सामाजिक और आर्थिक अन्याय होगा। नियमित पदों को समाप्त करने से वर्तमान वन रक्षक कैडर के पदोन्नति के अवसर सीमित हो जाएंगे, जिससे विभाग में कार्यरत कर्मचारियों का मनोबल गिरेगा। कम वेतन और अस्थायी प्रकृति की नियुक्तियों से वनों की रक्षा, अवैध कटान रोकने और वनाग्नि जैसी आपदाओं से निपटने के प्रति समर्पण में कमी आ सकती है। वन रक्षक विभाग की रीढ़ हैं। यदि यह ही कमजोर होगा तो प्रदेश की बेशकीमती आधार वन संपदा और वन्यजीव सुरक्षित नहीं रहेंगे। एसोसिएशन ने सरकार से अधिसूचना को तत्काल प्रभाव से वापस लेने की मांग रखी है। वहीं, सहायक वन रक्षक की भर्ती प्रक्रिया रोककर पूर्व की भांति नियमित वेतनमान पर ही वन रक्षकों की भर्ती सुनिश्चित करने, वन रक्षक कैडर के 500 पदों को यथावत रखने और विभागीय ढांचे के साथ कोर्ड छेड़छाड़ न करने का आग्रह किया है।