रोहड़ू। ऊपरी शिमला में बारिश-बर्फबारी से तापमान गिर गया है। इससे सेब बागवानों को खुशी है, लेकिन स्टाेन फ्रूट तैयार करने वालों की चिंता बढ़ा दी है। प्लम, खुमानी, बादाम और चेरी जैसी स्टोन फ्रूट फसलों में इस समय फ्लाॅवरिंग पूरी तरह हो चुकी है। अब फूलों से फल बनने की प्रक्रिया शुरू होने वाली है। ऐसे में यदि तापमान अचानक गिरता है या पाला पड़ता है, तो इससे फसल को नुकसान होने की आशंका बढ़ जाती है। उद्यान विशेषज्ञों के अनुसार स्टोन फ्रूट की फसलों में फूल निकलने के बाद का समय बेहद संवेदनशील होता है। इस दौरान तापमान शून्य या उससे नीचे चला जाए, तो फूल और बनने वाले छोटे फल झड़ सकते हैं। प्लम, खुमानी, बादाम और चेरी में फूल निकलने के बाद माइनस एक से दो डिग्री सेल्सियस तक का तापमान भी नुकसानदेह साबित हो सकता है। यदि लगातार ठंड और बादल बने रहते हैं, तो परागण की प्रक्रिया भी प्रभावित होती है। इससे फल बनने की दर कम हो सकती है। वहीं, सेब की फसल के लिए यह मौसम अनुकूल है। विशेषज्ञों का कहना है कि सेब में अभी फ्लाॅवरिंग शुरू नहीं हुई है और ठंडा मौसम पेड़ों के लिए लाभदायक माना जाता है। इससे पेड़ों की चिलिंग आवश्यकता पूरी होती है और आगे चलकर बेहतर फ्लॉवरिंग की संभावना रहती है। बागवानी विशेषज्ञ एवं कृषि विज्ञान केंद्र रोहड़ू की प्रभारी डाॅ. उषा शर्मा का कहना है कि यदि अगले कुछ दिनों तक तापमान सामान्य बना रहता है और पाला नहीं पड़ता है, तो स्टोन फ्रूट फसलों को बड़ा नुकसान होने की आशंका कम रहेगी। उन्होंने बागवानों को सलाह दी गई है कि मौसम की स्थिति पर नजर रखें और जरूरत पड़ने पर बगीचों में पारंपरिक उपाय अपनाकर पाले से बचाव करें। इससे अभी सेब की फसल को जमीन में नमी आने से लाभ मिलेगा।