बैसाख संक्रांति पर देवता साहिब शिल्का के मंदिर में पूजा करते ग्रामीण। संवाद
देवता को बुरांस के फूल किए अर्पित, हलवा पूरी का लगाया भोग
संवाद न्यूज एजेंसी
नित्थर(कुल्लू)। नित्थर क्षेत्र के आराध्य देवता बूढ़ा महादेव के वजीर देवता साहिब शिल्का के जंगल स्थित मंदिर में वैशाख संक्रांति के दिन विशेष पूजा की गई। ढमाह के ग्रामीणों ने बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया। गांव के युवाओं, बुजुर्गों ने इसमें अपनी भागीदारी निभाई। संक्रांति के दिन देवता साहिब के दरबार में हवन किया गया। बुरांस के फूलों को देवता साहिब को अर्पित किया गया। श्रद्धालुओं ने भोग बनाया और देवता साहिब को हलवा पूरी का भोग चढ़ाया। यह भोग सारे गांव में वितरित किया जाता है। देवता साहिब बूढ़ा महादेव के प्रमुख वजीर देवता साहिब शिल्का देवता हैं, जो नित्थर पंचायत के ढमाह गांव के साथ घने देवदारों के वृक्षों के बीच बसे हुए हैं। देवता साहिब चिह्न के रूप में विराजमान हैं। देवता का यह मंदिर विशाल देवदारों के वृक्षों के नीचे एक छोटे से स्थान पर विराजमान है, जोकि खुले में है। यहां न कोई द्वार, न कोई कोठी है और न ही विशाल मंदिर है। खासकर, नित्थर की माताओं और बहनों पर देवता साहिब की भरपूर अनुकंपा रहती है। देवता की मानता इतनी है कि न सिर्फ नित्थर, बल्कि पूरे आनी विधानसभा क्षेत्र, रामपुर और कुमारसैन क्षेत्र से श्रद्धालु शीश नवाने को पहुंचते हैं। देवता अपने श्रद्धालुओं की सभी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं। वर्ष भर मनाए जाने वाले तीज त्योहारों को यहां पर मनाया जाता है। उसी में से वैशाख का साजा भी है।