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Rampur Bushahar News: प्राइमरी स्कूल झाड़माजरी में 998 विद्यार्थियों को पढ़ा रहे महज पांच शिक्षक

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स्कूल में शिक्षकों के दस पद खाली, विद्यार्थियों की पढ़ाई हो रही प्रभावित
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संवाद न्यूज एजेंसी
बद्दी (सोलन)। निजी स्कूलों के बढ़ते प्रचलन के चलते जहां सरकारी स्कूल खाली हो रहे हैं, वहीं औद्योगिक क्षेत्र झाड़माजरी के प्राइमरी स्कूल में बच्चों की संख्या 998 तक पहुंच गई है। छात्रों की बढ़ती संख्या के बाद अब उन्हें बैठाने के लिए भी जगह कम पड़ने लगी है, जिससे अब अध्यापकों पढ़ाने में दिक्कतें आ रही हैं। स्कूल में अध्यापकों के दस पद खाली चल रहे हैं। स्कूल में केवल पांच अध्यापक करीब एक हजार बच्चों को पढ़ा रहे हैं। हालांकि इन पांच कक्षाओं में स्थानीय लोगों के मात्र चार बच्चे हैं। शेष सभी बच्चे प्रवासी कामगारों और झुग्गी झोंपड़ी में रहने वाले लोगों के हैं। स्कूलों में भोजन की व्यवस्था होने पर कामगार बच्चों को सरकारी स्कूलों में भेजने में प्राथमिकता दे रहे हैं लेकिन विद्यार्थियों की इतनी अधिक संख्या होने के बावजूद यहां पढ़ाई करवाने के लिए पांच जेबीटी अध्यापक ही हैं। स्कूल में आठ कक्षाएं हैं लेकिन विद्यार्थियों की संख्या के आगे यह कमरे छोटे पड़ने लगे हैं। स्कूल की पहली कक्षा में 118, दूसरी में 165, तीसरी में 211, चौधरी में 226 और पांचवीं 278 बच्चे पढ़ाई कर रहे हैं। नियमों के मुताबिक 40 बच्चों की कक्षा में एक अध्यापक पढ़ा सकता है लेकिन यहां पर चार गुना अधिक विद्यार्थी हैं। ऐसे में बच्चों की पढ़ाई तो दूर उन्हें कक्षा में चुपचाप बैठाना ही कठिन कार्य है। शिक्षा कार्य के अलावा अध्यापकों को वोटर लिस्ट बनाने, खेलकूद प्रतियोगिता में भी ड्यूटी लगती है। यही नहीं एक छात्र की प्रतिदिन ऑनलाइन 52 स्थानों पर एंट्री होती है। इनके खाता नंबर तक बनाने का कार्य भी अध्यापकों के पास ही है। ऐसे में इतनी अधिक संख्या वाले स्कूल में अध्यापकों के पद पर्याप्त नहीं है। अध्यापक स्कूल का काम घर पर करते हैं। पंचायत के प्रधान सोनू देवी, पूर्व प्रधान अच्छर पाल सिंह ने सरकार से मांग की कि जिन स्कूलों में बच्चों की संख्या अधिक हैं, वहां पर सभी सुविधाएं मुहैया कराई जाए। स्कूल की मुख्याध्यापिका नीलम कुमारी ने बताया कि उनके स्कूल में 998 विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं लेकिन उस हिसाब से भवन नहीं है। तीन कमरे उन्हें राउंड टेबल चेरिटेबल ट्रस्ट की ओर से 2018 में मिले है। इससे भवन की कमी पहले से कम हुई है। अध्यापकों की कमी के बावजूद भी उन्होंने स्कूल में पढ़ाई जारी रखी हुई है। हाल ही में निपुण मेले में उनके स्कूल के बच्चों के क्रिएटिव कार्य को सराहा है। निजी कंपनी संचालक उन्हें भवन बनाने के लिए प्रस्ताव तो दे रही है लेकिन अब जगह नहीं बची है। बीईपीओ रामानंद शर्मा ने बताया कि अध्यापकों के रिक्त पदों को लेकर उच्च अधिकारियों को अवगत कराया गया है।
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